नयी दिल्ली , अप्रैल 01 -- एक अभूतपूर्व आयोजन में एक ही स्थान पर, एक ही समय पर, एक ही विषय पर, एक साथ 21 भाषाओं में किसी पुस्तक का विमोचन सम्पन्न हुआ। स्पोर्ट्स ए वे ऑफ़ लाइफ संस्था के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता राजस्थान एवं हिमाचल के पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र ने की। इस अवसर पर विख्यात हाॅकी खिलाड़ी, ओलम्पियन एवं अर्जुन अवाॅर्डी अशोक ध्यानचन्द, संस्था के उपाध्यक्ष डाॅ. मिलिन्द पाण्डेय सहित भारत के विभिन्न प्रान्तों के माननीय सांसदगण उपस्थित हुए और उन्होंने एक साथ 21 भाषाओं में तैयार खेल वर्णमाला का एक साथ अपने कर कमलों से लोकार्पण किया।

संस्था के अध्यक्ष एवं विख्यात खेल शोधकर्ता डाॅ. कनिष्क पाण्डेय की यह संकल्पना भारत में खेल संस्कृति विकसित करने के लिए पिछले एक दशक से लगातार जारी शोध एवं प्रयोगों का परिणाम है। इस अवसर पर कनिष्क ने बताया कि जिस प्रकार अक्षर ज्ञान बच्चे में पढ़ाई के प्रति अभिरूचि पैदा करने की पहली कड़ी है उसी प्रकार खेल वर्णमाला बच्चों में खेल के प्रति लगाव पैदा करने की कड़ी क्यों नहीं बनायी जा सकती? खेल वर्णमाला का दोहरा लाभ है। यहाँ बच्चा अक्षर ज्ञान और पढ़ाई से जुड़ने के साथ-साथ खेलों के साथ भी अपना जुड़ाव विकसित करेगा। जैसे ए फाॅर एप्पल, बी फाॅर बाॅय तथा क से कबूतर, ख से खरगोश सीख कर पढ़ाई से जोड़ा जा सकता है तो साथ ही साथ क से कबड्डी, ख से खो-खो, ए फाॅर एथलीट, बी फोर बास्केटबॉल पढ़ा कर उसे पढ़ाई के साथ-साथ खेलों से भी जोड़ने में संकोच नहीं करना चाहिए।

स्पोर्ट्स ए वे ऑफ़ लाइफ खेल वर्णमाला के चार लक्ष्य:1. खेल साक्षरता में वृद्धि2. खेल और पढ़ाई को प्रतिस्पर्धी के बजाय पूरक के रूप में विकसित करना।

3. व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास में अनुशासन, लीडरशिप, निर्णय क्षमता जैसे 16 खेल मूल्यों का समावेशन किंडर गार्डन स्तर पर ही सुनिश्चित करना।

4. बच्चों में बढ़ती मोबाइल, कम्प्यूटर, ऑनलाइन गेमिंग जैसी अति आदतों से दूर करना और आउटडोर गतिविधियों को प्रोत्साहित करना।

खेल वर्णमाला हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू, संस्कृत, मराठी, बांग्ला, खासी, भोजपुरी, बुन्देली, राजस्थानी, कुमाऊँनी, गढ़वाली, कश्मीरी, पंजाबी, तेलगु, तमिल, कन्नड़, उड़िया, मलयालम, गुजराती सहित दो विदेशी भाषाओं अरबी और नेपाली में भी तैयार की गई है। नेपाली भाषा में तैयार खेल वर्णमाला का विमोचन करने के लिए नेपाल के संसद सदस्य अभिषेक प्रताप शाह स्वयं उपस्थित थे। शाह नेपाल की कपिलवस्तु सीट से सांसद हैं और इस कार्यक्रम में प्रतिभाग करने के लिए काठमांडू से यहाँ पधारे हैं। उन्होंने न केवल इस किताब का विमोचन किया बल्कि स्पोर्ट्स ए वे ऑ लाइफ के खेल साक्षरता अभियान की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने यह भी कहा कि इस खेल वर्णमाला को अपने देश की प्राथमिक पाठशालाओं में अनिवार्य रूप से लागू किये जाने की संस्तुति अपनी सरकार से करेंगे।

कनिष्क ने आगे बताया कि हमारे देश में खेल और पढ़ाई को दो अलग-अलग विधाऐं मानकर नीतियाँ अब तक बनायी जाती रही हैं। खेल और पढ़ाई एक दूसरे के प्रतिरोधी है ऐसी नकारात्मक मनोवृत्ति समाज में रही है। जबकि वास्तविकता यह है कि पढ़ाई और खेल प्रतिस्पर्धी नहीं बल्कि एक दूसरे के पूरक है।

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