नयी दिल्ली , दिसंबर 03 -- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रधान सचिव डॉ. पीके मिश्रा ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (इंडियन स्कूल ऑफ माइन्स), धनबाद के शताब्दी स्थापना सप्ताह के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनने में इस संस्थान की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया।
डॉ. मिश्रा ने संस्थान की 100 वर्षों की गौरवशाली विरासत को नमन करते हुए खनन, ऊर्जा, पृथ्वी विज्ञान और अनुप्रयुक्त इंजीनियरिंग के क्षेत्र में आईआईटी धनबाद के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा, "आईआईटी धनबाद एशिया में खनन शिक्षा का अग्रणी संस्थान रहा है और इसने कोल इंडिया, ओएनजीसी, जीएसआई, सीएमपीडीआई तथा एनटीपीसी जैसे राष्ट्रीय संस्थानों को लगातार विशेषज्ञता प्रदान की है।" उन्होंने यह भी कहा कि शताब्दी वर्ष हमें यह याद दिलाता है कि ज्ञान के प्रति निरंतर समर्पण कैसे सकारात्मक सामाजिक परिणाम उत्पन्न कर सकता है।
डॉ. मिश्रा ने भारत के व्यापक विकास लक्ष्यों पर विचार करते हुए प्रधानमंत्री मोदी के उस विजन को रेखांकित किया जिसमें प्रकृति, संस्कृति और तकनीकी नेतृत्व का संतुलन है। उन्होंने डिजिटल भुगतान, सामाजिक सुरक्षा, अंतरिक्ष अन्वेषण और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में हुई उल्लेखनीय प्रगति का जिक्र किया तथा जोर दिया कि भारत का युवा और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र इस प्रगति के केंद्र में हैं।
डॉ. मिश्रा ने भारत में सिविल सेवा और शासन के बदलते स्वरूप को भी रेखांकित किया तथा सहयोग, अनुकूलनशीलता और निरंतर सीखने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने मिशन कर्मयोगी और आईजीओटी-कर्मयोगी प्लेटफॉर्म जैसी पहलों की प्रशंसा की, जो सार्वजनिक सेवकों की क्षमता निर्माण को नया आयाम दे रही हैं।
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