नयी दिल्ली , जनवरी 27 -- इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को विश्वास जताया कि 2029 की ओर बढ़ते हुए देश के सेमीकंडक्टर मिशन के दूसरे चरण (सेमिकॉन 2.0) के तहत चिप निर्माण क्षमताओं के विस्तार के साथ भारत वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में उभरेगा।
श्री वैष्णव ने कहा कि भारत ने 28 नैनोमीटर (एनएम) से सात एनएम, सात से तीन एनएम और आगे दो एनएम तक की चिप बनाने के लिये स्पष्ट रोडमैप तैयार कर लिया है। उन्होंने कहा कि ताइवान, जापान, दक्षिण कोरिया और अन्य देशों के चिप निर्माण के सफर का अध्ययन किया गया है और देश की प्रतिभा को आधार बनाकर दो नैनोमीटर तक पहुंचने की रणनीति बनायी गयी है।
विशेषज्ञों के अनुसार 28 एनएम से सात एनएम और दो एनएम की ओर बढ़ना ट्रांजिस्टर आकार में आती पीढ़ीगत कमी को दर्शाता है। इससे ट्रांजिस्टर के घनत्व में भारी वृद्धि, प्रदर्शन में तेजी और बेहतर ऊर्जा दक्षता संभव होती है। श्री वैष्णव ने कहा, " दुनिया अब मानती है कि 2035 तक भारत विश्व के सबसे महत्वपूर्ण सेमीकंडक्टर देशों में शामिल होगा।"उन्होंने यहां एक कार्यक्रम से इतर बातचीत में कहा कि सेमीकंडक्टर मिशन के तहत रेडियो फ्रीक्वेंसी, नेटवर्किंग, पावर, सेंसर और मेमोरी सहित छह प्रणालियों में देश अपनी बौद्धिक संपदा (आईपी) विकसित करेगा। उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर मिशन के चार वर्ष पूरे होने पर करीब 10 परियोजनाएं विकासाधीन हैं, जबकि चार की उत्पादन प्रक्रिया इसी वर्ष शुरू होगी। अब तक 24 स्टार्टअप्स ने सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन किये हैं और 300 से अधिक संस्थानों में छात्रों को चिप डिजाइनिंग का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
श्री वैष्णव ने चिप डिजाइन स्टार्टअप्स को संबोधित करते हुए कहा कि देश 'सेवा प्रदाता से उत्पाद निर्माण राष्ट्र' बनने की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि यह यात्रा 2022 में शुरू हुई थी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुरुआत में ही पूरे इकोसिस्टम के विकास पर जोर दिया था। अल्प समय में दो दर्जन से अधिक स्टार्टअप्स कार्यक्रम का हिस्सा बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि मिशन के तहत दिये जा रहे समर्थन को दोगुना करने का इरादा है और अगले चरण में कम से कम 50 कंपनियों को जोड़ने की योजना है।
हाल ही में श्री वैष्णव ने नीदरलैंड्स के वेल्डहोवन स्थित एएसएमएल मुख्यालय का दौरा किया था, जो दुनिया में लिथोग्राफी सिस्टम बनाने वाली दुनिया की अग्रणी कंपनी है। उन्होंने कहा था कि धोलेरा में स्थापित होने वाली फैब में एएसएमएल के उपकरणों का उपयोग किया जाएगा। उन्होंने कहा कि एएसएमएल का भारत आना महत्वपूर्ण है, क्योंकि वैश्विक उपकरण निर्माता भारत की डिजाइन क्षमता, विशाल प्रतिभा और स्थिर नीतियों के कारण यहां निवेश के इच्छुक हैं।
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