बेंगलुरु , अक्टूबर 25 -- भारतीय रेलवे ने देश के पूरी तरह से विकसित अगली पीढ़ी की रेल सुरक्षा प्रणाली कवच 4.0 को वर्ष 2027 से लागू करने की तैयारी कर ली है।
बेंगलुरु स्थित नोवा कंट्रोल टेक्नोलॉजिक्स प्राइवेट लिमिटेड का लक्ष्य 2027 की शुरुआत तक इसे पूरे देश में लागू करना है। ई2ई रेल के अध्यक्ष विनय राव ने यूनीवार्ता को बताया कि नोवा ने अनुसंधान डिजाइन एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) में आवेदन किया है और परीक्षण एवं सत्यापन में गहनता से लगा हुआ है। उन्होंने कहा, "अनुमोदन, क्षेत्र परीक्षण और बड़े पैमाने पर उत्पादन की व्यवस्था अगले वर्ष पूरी हो जाएगी, जिसका लक्ष्य 2027 की शुरुआत तक रेलवे पटरियों पर पूर्ण एकीकरण करना है।" उन्होंने कहा कि कि यह प्रणाली अनगिनत टाले जा सकने वाले रेल हादसों को रोक सकती है।
कवच 4.0 स्वदेशी है और इसमें ट्रैकसाइड यूनिट, आरएफआईडी टैग, संचार टावर और ऑनबोर्ड लोकोमोटिव मॉड्यूल मौजूदा सिग्नलिंग सिस्टम के साथ सुरक्षित रूप से नेटवर्क किए गए हैं। श्री राव ने बताया कि प्रत्येक इंस्टॉलेशन को लाइव संचालन के लिए चालू करने से पहले कठोर परीक्षण से गुजरना पड़ता है। भारत का रेल नेटवर्क लगभग 1,00,000 किलोमीटर में फैला है। इनमें से 10 प्रतिशत से भी कम में कवच के कार्यान्वयन के लिए निविदाएं दी गई हैं।
उन्होंने कहा कि एक बार यह प्रणाली प्रमाणित हो जाती है, तो निजी यार्ड, बंदरगाह, कोयला खदानें, इस्पात संयंत्र और अंतरराष्ट्रीय बाजार भी इससे लाभान्वित हो सकते हैं। इस प्रणाली में 5जी संचार, उन्नत साइबर सुरक्षा और भविष्य की प्रणालियों के साथ बेहतर अंतर-संचालनीयता शामिल है, जो इसे कम से कम आगामी 20 वर्षों के लिए तैयार बनाती है।
श्री राव ने कहा कि यह केवल एक उत्पाद नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने का एक मिशन है, जिससे रेल दुर्घटनाओं से किसी की भी जान जाने से रोका जा सके। कर्नाटक इस परियोजना का केंद्र रहा है। बेंगलुरु के कुशल कार्यबल, संस्थागत समर्थन और टाटा एलेक्सी के साथ साझेदारी ने इस घरेलू नवाचार को संभव बनाया है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित