(जयंत रॉय चौधरी से)नई दिल्ली , दिसंबर 3 -- 54 वर्ष पूर्व, आज ही के दिन, जब भारत पर पाकिस्तानी वायुसेना के एफ-86 सेबरजेट और एफ-104 स्टारफाइटर्स के आक्रमण के बाद भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तानी ठिकानों पर हमला करने के लिए सीमा पार की तब ठीक उसी समय अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन और उनके राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हेनरी किसिंजर टेलीफोन पर भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध शुरू होने की चर्चा कर रहे थे।
किसिंजर ने राष्ट्रपति निक्सन से कहा कि "ऐसा लगता है कि पश्चिमी पाकिस्तान ने (भारत पर) हमला किया है क्योंकि पूर्वी पाकिस्तान में हालात बिगड़ रहे हैं", तो निक्सन भड़क उठे और अपने प्रमुख सहयोगी से कहा, "पाकिस्तान की बात सुनकर दिल बैठ जाता है। भारत का ऐसा करना और वह भी तब जब हमने उस **** (भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के लिए अशोभनीय शब्द) को चेतावनी दी थी..."वर्ष 1971 में तीन दिसंबर को वाशिंगटन समय के अनुसार सुबह 10.45 बजे हुई इस बातचीत को आधिकारिक तौर पर रिकार्ड किया गया और कई दशकों बाद विदेश विभाग ने इसे उस अवधि के ऐतिहासिक दस्तावेजों के भाग के रूप में जारी किया।
भारत के जवाबी हमले से पहले, पाकिस्तानी वायुसेना ने ऑपरेशन चंगेज शुरू किया और श्रीनगर, अमृतसर और पठानकोट समेत ग्यारह भारतीय वायुसेना ठिकानों पर बमबारी की, लेकिन ज़्यादा नुकसान नहीं हुआ, क्योंकि भारत ने पहले ही अपनी वायु सेना को अग्रिम गुप्त ठिकानों पर तैनात कर दिया था। इस बीच, पाकिस्तानी सेना कश्मीर में युद्धविराम रेखा पार करके भारत में घुस आई।
इसके जवाब में, भारतीय वायुसेना ने चकलाला, मुरीद, सरगोधा, चंदर, रिसालेवाला, रफीकी, मसरूर और शोरकोट में पाकिस्तानी हवाई अड्डों पर बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई शुरू की।
किसिंजर ने निक्सन से यह भी कहा कि भारत के जवाबी युद्ध को रोकने के लिए अमेरिका को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से संपर्क करना चाहिए। "विदेश विभाग का मानना है और मैं भी इस बात से सहमत हूं कि कार्रवाई की पुष्टि होने के बाद हमें इसे सुरक्षा परिषद में ले जाना चाहिए।
राष्ट्रपति निक्सन जानना चाहते थे कि इस पर कौन आपत्ति करेगा। किसिंजर ने कहा, "भारत और सोवियत यूनियन..और कोई नहीं।"जारी किये गये कागजात से खुलासा हुआ कि युद्ध आरंभ होने से दो दिन पूर्व, अमेरिकी के राजदूत केनेथ कीटिंग ने निक्सन का यह संदेश देने के लिए इंदिरा गांधी से मुलाकात की थी कि भारत सीमाओं पर लामबंदी करना बंद करे।
भारत की प्रधानमंत्री ने यह स्पष्ट किया कि "पाकिस्तान ने पहले अपनी सेनाओं को सीमाओं पर भेजा था और उसे किसी ने ऐसा करने से नहीं रोका।"श्रीमती गांधी ने यह स्पष्ट किया कि पाकिस्तानी तानाशाह जनरल याह्या खान ने अपने लिए समस्याएं खुद उत्पन्न की हैं और हम उनके लिए हालात को आसान बनाने की स्थिति में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि भारत से कहा जा रहा है कि वह जनरल याह्या के कुकर्मों को जारी रहने दे और "हम ऐसा होने नहीं देंगे।"जब कीटिंग ने यह देखा कि भारतीय प्रधानमंत्री का रुख "बहुत दृढ़" है, तो प्रधानमंत्री ने जवाब दिया कि उनका रुख पहले के मुकाबले थोड़ा ज्यादा सख्त है और यह भी कहा कि उनका धैर्य जवाब दे चुका है। वह नहीं जानतीं कि वह भारतीयों को कैसे कहें कि हमें धैर्य बनाये रखना चाहिए और आगे कहा "मैं ऐसा नहीं कर सकती।"भारतीय सेना के पाक सीमा से प्रवेश करने की कथित हालिया घटनाओं पर कीटिंग के टिप्पणियां शुरू करने पर उन्होंने यह कहकर उसे रोका, "हम उन सुझावों को नही सुन सकते, जो हमें कमजोर करते हैं।"उसी दिन वाशिंगटन को भेजे एक संदेश में अमेरिकी राजदूत ने यह स्पष्ट किया, "ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है कि वह भारत के हितों की रक्षा करने से पीछे हट रही हैं।
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