नयी दिल्ली , दिसंबर 31 -- प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के श्रीनगर क्षेत्रीय कार्यालय ने विशेष पीएमएलए न्यायालय में नरेश कुमार उर्फ नरेश गुलिया, अतिउल रहमान मीर, अजय कुमार उर्फ अजय कुमार चौधरी और रमेश उर्फ रमेश गुलिया के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है।
विभाग ने बुधवार को यह जानकारी दी। न्यायालय ने आरोपपत्र पर संज्ञान लेते हुए अगली सुनवाई की तारीख 28 फरवरी 2026 निर्धारित की है।
ईडी ने लद्दाख पुलिस के लेह पुलिस थाने में लेह निवासी अतिउल रहमान मीर और जम्मू निवासी अजय कुमार उर्फ अजय कुमार चौधरी के खिलाफ 'इमोलिएंट कॉइन' नाम के नकली क्रिप्टोकरेंसी योजना के मामले में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर जांच शुरू की थी।
जांच में खुलासा हुआ कि हरियाणा का सोनीपत निवासी नरेश गुलिया नकली क्रिप्टोकरेंसी बेचने और मल्टी-लेवल व्यवसाय चलाने का मास्टरमाइंड था। इसके लिए उसने 'इमोलिएंट कॉइन' नामक फर्जी मोबाइल एप्लिकेशन को डिजाइन और विकसित किया था। निवेशकों को धोखा देने के बाद उसने 2019 में कंपनी को जानबूझकर भंग कर दिया गया था।
नरेश गुलिया, अजय कुमार चौधरी और अतिउल रहमान मीर की मिलीभगत से यह धोखाधड़ी कर रहा था। निवेशकों को 10 महीनों में रकम दोगुना करने और भूमि के टुकड़े का लालच देता था। नकली क्रिप्टोकरेंसी के मूल्य को कृत्रिम रूप से बढ़ाया-घटाया जाता था और जमा रखने की अवधि पूरा होने से पहले उक्त मोबाइल एप्लिकेशन ने अक्टूबर-नवंबर 2019 में अचानक काम करना बंद कर दिया।
जांच में पता चला कि नरेश गुलिया, अतिउल रहमान मीर और अजय कुमार चौधरी के पास 16.81 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित संपत्ति थी, जो लेह और जम्मू के बहुत सारे लोगों को नकली क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने के नाम पर इकट्ठी की गयी थी।
ईडी ने नरेश गुलिया के निवास से 91 लाख रुपये की नकदी जब्त की और बाद में नरेश गुलिया, अजय कुमार चौधरी, अतिउल रहमान मीर, उनके परिवार के सदस्यों और अन्य के स्वामित्व वाली 13 अचल संपत्तियों और दो बैंक खातों में करीब 6 करोड़ रुपये की जमा राशि थी।
ये संपत्तियां जम्मू, नयी दिल्ली और हरियाणा के सोनीपत में स्थित हैं।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित