शिमला , दिसंबर 15 -- बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के हाशिए पर पड़े लोगों की आवाज़ को शब्दों में डालने के लिए बनाए गए 125 साल पुराने समाचार पत्र 'मूकनायक' ने रविवार को यहां अपना दूसरा राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया।

यहां के गेएटी थियेटर नामक ऐतिहासिक स्थल पर चले इस सम्मेलन में देश भर से लगभग 300 पत्रकार, लेखक और अन्य लोग एक साथ आए। इन लोगों ने जातिगत भेदभाव, अत्याचार और कमजोर समुदायों के अधिकारों के मुद्दों को उजागर करने के लिए 'मूकनायक' की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

इस कार्यक्रम की अध्यक्षता 'मूकनायक' के राष्ट्रीय मुख्य संपादक तुषार गायकवाड़ ने की। इसमें हिमाचल प्रदेश से भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) सेवा में शामिल होने वाले पहले अधिकारियों में से एक, कश्मीर सिंह चौहान मुख्य अतिथि थे। श्री चौहान ने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने और ऐतिहासिक रूप से हाशिए पर धकेली गई आवाज़ों के लिए जगह बनाने में जागरूक पत्रकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया।

वक्ताओं ने राज्य में 'मूकनायक' के ब्यूरो चीफ देव भारती के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश में संगठन की बढ़ती उपस्थिति पर भी प्रकाश डाला। वर्तमान में, राज्य भर में 62 जमीनी स्तर जुड़े पत्रकार काम कर रहे हैं। ये पत्रकार वंचित किए जाने और " अन्याय के स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय चर्चा में लाने में मदद कर रहे हैं।

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