बिलासपुर , मार्च 17 -- छत्तीसगढ़ में साल 2014 के बहुचर्चित नसबंदी कांड में करीब 11 साल चार महीने बाद बिलासपुर जिला अदालत ने आज महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।
प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश शैलेश कुमार की अदालत ने मामले में आरोपी सर्जन डॉ. आर.के. गुप्ता को दोषी ठहराते हुए दो साल की सजा और 25 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया है।
अदालत ने अपने फैसले में माना कि सर्जन द्वारा अत्यधिक कम समय में बड़ी संख्या में ऑपरेशन करना गंभीर लापरवाही का मामला है। सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि डॉ. गुप्ता ने करीब तीन घंटे में 83 नसबंदी ऑपरेशन किए थे, जिससे संक्रमण और अन्य जटिलताओं का खतरा बढ़ गया।
यह घटना नवंबर 2014 में बिलासपुर जिले के पेंडारी और पेंड्रा में आयोजित सरकारी नसबंदी शिविरों के दौरान हुई थी। ऑपरेशन के बाद कई महिलाओं की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। स्थिति गंभीर होने पर 100 से अधिक महिलाओं को सिम्स, जिला अस्पताल और अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिनमें से 15 महिलाओं की मौत हो गई थी।
मामले की जांच के दौरान संक्रमण (सेप्टीसीमिया) और ऑपरेशन के बाद दी गई दवा 'सिप्रोसिन' में जिंक फॉस्फाइड (चूहामार जहर) मिलाए जाने जैसे आरोप भी सामने आए थे। हालांकि, दवा में जहर मिलाने के आरोपों को लेकर पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर महावर फार्मा और कविता फार्मास्यूटिकल्स से जुड़े पांचों आरोपियों को अदालत ने बरी कर दिया।
अदालत ने डॉ. गुप्ता को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 (ए) के तहत गैरइरादतन हत्या का दोषी मानते हुए दो साल की सजा सुनाई। इसके अलावा धारा 337 के तहत 6 माह की सजा और 500 रुपये का जुर्माना तथा एक अन्य धारा में एक माह की सजा भी दी गई है।
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