रामनगर 01जनवरी (वार्ता) उत्तराखंड के रामनगर में नववर्ष के पहले दिन खालसा खनन ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन सोसायटी से जुड़े ट्रांसपोर्टरों ने 10 टायरा वाहनों (ट्रक) के जरिए खनन कराए जाने के विरोध में एकजुट होकर बैठक की और उत्तराखंड वन विकास निगम, देहरादून के प्रबंध निदेशक को पत्र प्रेषित किया।
ट्रांसपोर्टरों ने स्पष्ट रूप से बड़े ट्रकों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की है। एसोसिएशन की ओर से पत्र में बताया गया कि इससे पूर्व भी इस विषय में निगम प्रबंधन को अवगत कराया गया था, जिसके बाद बंजारी प्रथम गेट पर ट्रकों के संचालन पर प्रतिबंध लगाया गया था। लेकिन आरोप है कि आरएम हरीश पाल/प्रभागीय प्रबंधक ने कुछ स्टोन क्रेशर स्वामियों से मिलीभगत कर 27 दिसंबर 2025 को पुनः ट्रकों को अनुमति दे दी। इस निर्णय के बाद खनन व्यवस्था पूरी तरह से प्रभावित हो गई।
ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि इन बड़े ट्रकों को अनुमति मिलने से छोटे खनन वाहन स्वामियों में भारी आक्रोश है, जिसके चलते उन्होंने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी। इसका सीधा असर खनन राजस्व पर पड़ा है। आंकड़ों के अनुसार 26 दिसंबर को जहां लगभग 450 रॉयल्टी जारी हुईं, वहीं 27 दिसंबर को अवकाश रहा। 28 दिसंबर को यह संख्या घटकर लगभग 72 रह गई, 29 दिसंबर को करीब 70, 30 दिसंबर को मात्र 5 और 31 दिसंबर को केवल दो रॉयल्टी ही जारी हो सकीं।
एसोसिएशन ने कहा कि आरएम हरीश पाल के आदेशों के कारण बंजारी प्रथम गेट पर सुचारू रूप से चल रहा खनन कार्य पूरी तरह ठप हो गया है। हड़ताल के चलते दूर-दराज क्षेत्रों से खनन वाहनों में कार्य करने वाले मजदूर भी अपने घरों को लौट गए हैं, जो एक गंभीर चिंता का विषय है।
ट्रांसपोर्टरों ने प्रबंधन से मांग की है कि मामले को गंभीरता से संज्ञान में लेते हुए तत्काल उचित कार्रवाई की जाए और क्षेत्र में इन ट्रकों के संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए, ताकि खनन कार्य दोबारा सुचारू रूप से शुरू हो सके और छोटे वाहन स्वामियों व श्रमिकों को राहत मिल सके।
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