पटना , अप्रैल 07 -- बिहार ग्रामीण कार्य विभाग की ओर से दशकों से संपर्क विहीन रही राज्य की 1.21 लाख बसावटों को बारहमासी पक्की ग्रामीण सड़कों से जोड़ने के बाद अब उन ग्रामीण बसावटों का सीधा जुड़ाव बड़े राजमार्गों से किया जा रहा है।

इस दिशा में विभाग की ओर से सुलभ संपर्कता योजना की शुरुआत की गई है। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों को सीधे उच्च श्रेणी के मार्गों से जोड़ते हुए विकास की गति को नई तेजी प्रदान करेगी।

उल्लेखनीय है कि राज्य में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, मुख्यमंत्री ग्राम सम्पर्क योजना एवं ग्रामीण टोला सम्पर्क निश्चय योजना के तहत कुल 1,29,990 संपर्क विहीन बसावटों की पहचान की गई थी। इनमें से अब तक 1,21,151 बसावटों को 1,20,178 किलोमीटर से अधिक लंबी पक्की सड़कों के माध्यम से जोड़ा जा चुका है। वहीं शेष बसावटों को भी शीघ्र पक्की ग्रामीण सड़क से जोड़ने के लिए कार्य तीव्र गति से प्रगति पर है। इस व्यापक ग्रामीण सड़क संपर्कता अभियान ने ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन की बुनियादी समस्याओं का स्थायी समाधान सुनिश्चित किया है।बसावटों के पक्की सड़कों से जुड़ने के बाद अब सुलभ संपर्कता योजना के माध्यम से इस बुनियादी संपर्कता को और अधिक सुलभ बनाया जा रहा है।

राज्य के कई ऐसे गाँव और टोले हैं, जहाँ मुख्य सड़कों तक पहुँचने के लिए लोगों को संकरे, घुमावदार या कच्चे रास्तों से होकर गुजरना पड़ता था। विशेषकर बारिश के दिनों में यह सफर एक बड़ी चुनौती बन जाता था। इस नई योजना के माध्यम से राज्य के उन दुर्गम और दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों को अब सीधे राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग तथा वृहद जिला पथों से जोड़ा जा रहा है। इसके तहत क्षेत्रीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नए सुलभ मार्गों और वैकल्पिक रास्तों (थ्रू रूट या बाईपास) का नवनिर्माण तथा जर्जर हो चुकी सड़कों का पुनर्निर्माण किया जा रहा है, जिससे संकरे रास्तों के जाम से ग्रामीणों को मुक्ति मिल सके।

इस दिशा में तेजी से धरातल पर कार्य किया जा रहा है।

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