राजकोट , जनवरी 11 -- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को वीडियो संदेश के माध्यम से श्रीमद् विजयरत्न सुंदर सूरीश्वरजी महाराज की 500वीं पुस्तक के विमोचन अवसर पर कहा कि जब दुनिया विभाजन और टकराव से जूझ रही है, तब ''प्रेमनु विश्व, विश्वनो प्रेम'' यह एक ग्रंथ ही नहीं, यह एक मंत्र है।
श्री मोदी ने कहा कि महाराज साहब की 500 रचनाएं एक ऐसा विशाल सागर है, जिसमें भांति-भांति के विचार रत्न समाहित हैं। इन पुस्तकों में मानवता की तमाम समस्याओं के सहज और आध्यात्मिक समाधान उपलब्ध हैं। समय और परिस्थितियों के अनुसार जब जिसे जैसा मार्गदर्शन चाहिए, यह अलग-अलग ग्रंथ उसके लिए प्रकाश पुंज का काम करेंगे।
उन्होंने कहा कि अहिंसा, अपरिग्रह और अनेकांत, प्रेम, सहिष्णुता और सद्भाव हमारे तीर्थंकरों ने हमें जो शिक्षाएं दी हैं, हमारे पूर्व के आचार्यों ने हमें जो पाठ पढ़ाए हैं, उन सबको आधुनिक और सामयिक स्वरूप में हम इन रचनाओं में देख सकते हैं। खासकर, आज जब दुनिया विभाजन और टकराव से जूझ रही है, तब ''प्रेमनु विश्व, विश्वनो प्रेम'' यह एक ग्रंथ ही नहीं, यह एक मंत्र भी है। यह मंत्र हमें प्रेम की शक्ति का परिचय तो कराता ही है, जिस शांति और सद्भाव की तलाश में आज दुनिया परेशान है, यह मंत्र हमें उस तक पहुँचने का रास्ता दिखाता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज के इस पावन अवसर पर सर्वप्रथम मैं हम सभी के प्रेरणास्रोत पूज्य भुवनभानुसूरीश्वर जी महाराज साहब के चरणों में प्रणाम करता हूं। प्रसांतमूर्ति सुविशाल गच्छाधिपति पूज्य श्रीमद् विजय राजेंद्रसूरीश्वर जी महाराज साहब, पूज्य गच्छाधिपति श्री कल्पतरूसूरीश्वर जी महाराज साहब, सरस्वती कृपापात्र परम पूज्य आचार्य भगवंत श्रीमद विजयरत्नसुंदरसूरीश्वर जी महाराज और इस समारोह में उपस्थित सभी साधु-साध्वी को मैं नमन करता हूं।
श्री मोदी ने कहा, "ऊर्जा महोत्सव इस समिति से जुड़े सभी सदस्यों भाई कुमारपाल भाई, कल्पेश भाई, संजय भाई, कौशिक भाई, ऐसे सभी महानुभावों का भी मैं अभिनंदन करता हूं। पूज्य संतजन, आज हम सभी श्रीमद् विजयरत्न सुंदर सूरीश्वर जी महाराज साहब की 500वीं पुस्तक के विमोचन के पुण्य भागी बन रहे हैं।"उन्होंने कहा कि महाराज साहब ने ज्ञान को सिर्फ ग्रंथों तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि जीवन में उतारकर दिखाया है, औरों को भी जीवन में उतारने के लिए प्रेरित किया है। उनका व्यक्तित्व संयम, सरलता और स्पष्टता का अद्भुत संगम है। जब वे लिखते हैं, तो शब्दों में अनुभव की गहराई होती है। जब वे बोलते हैं, तो वाणी में करुणा की शक्ति होती है। जब वह मौन होते हैं, तो भी मार्गदर्शन मिलता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि महाराज साहब की 500वीं पुस्तक का विषय, ''प्रेमनु विश्व, विश्वनो प्रेम'', यह शीर्षक अपने आप में कितना कुछ कह देता है। मुझे विश्वास है कि, हमारा समाज, हमारे युवा और पूरी मानवता उनकी इस रचना का लाभ उठाएगी। इस विशेष अवसर पर ऊर्जा महोत्सव का यह आयोजन जन-जन में एक नई विचार ऊर्जा का संचार करेगा। मैं आप सभी को इस अवसर की बधाई देता हूं।
श्री मोदी ने कहा कि हमारे जैन दर्शन का सूत्र है ''परस्पर उपग्रहो जीवानाम।'' यानी, हर जीवन, दूसरे जीवन से जुड़ा है। जब हम इस सूत्र को समझते हैं, तो हमारी दृष्टि व्यष्टि से हटकर समष्टि से जुड़ जाती है। हम व्यक्तिगत आकांक्षा से ऊपर उठकर समाज, राष्ट्र और मानवता के लक्ष्यों की ओर सोचने लगते हैं।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित