चित्तूर (आंध्र प्रदेश) , दिसंबर 14 -- केन्द्र सरकार की बाल विवाह उन्मूलन के लिए 100 दिन की सघन कार्य योजना से प्रेरणा लेकर चित्तूर स्थित एनजीओ रूरल एजुकेशन एंड लिबर्टी (रियल) ने जिले को एक वर्ष की अवधि में बाल विवाह से मुक्त करने की रणनीति बनायी है।
'बाल विवाह मुक्त भारत' पहल के एक साल पूरे होने पर शुरू किए गए राष्ट्रीय 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान से तालमेल बिठाते हुए 'रियल' ने सरकारी विभागों, कानून प्रवर्तन एजेंसियों, चुने हुए प्रतिनिधियों और सामुदायिक संस्थानों के साथ मिलकर काम करने का संकल्प लिया है।
एनजीओ ने रविवार को यहां जारी एक विज्ञप्ति में कहा कि उसका यह अभियान स्कूलों और शिक्षण संस्थानों, धार्मिक स्थलों, जहां ऐसी शादियां होती हैं उनमें विवाह से संबंधित सेवा प्रदाताओं, ग्राम पंचायतों और नगर निगम वार्डों पर ध्यान केंद्रित कर इसे रोकने के कई तरीके अपनाता है।
इसमें कहा गया है कि जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन (जेआरसी) की साझीदार संस्था 'रियल' ने अब तक पूरे देश में एक लाख से अधिक बाल विवाह को रोका है। संस्था ने पिछले साल सिर्फ चित्तूर जिले में 209 बाल विवाह रोके हैं।
बाल विवाह मुक्त भारत अभियान की पहली वर्षगांठ 27 नवंबर 2024 को मनाने के लिए 'रियल' ने जिले भर के स्कूलों, कॉलेजों और ग्राम समुदायों में जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया और शपथ समारोह भी आयोजित किए।
संगठन समुदायों को बाल विवाह निषेध अधिनियम के प्रावधानों के बारे में भी जागरूक कर रहा है और चेतावनी दी है कि कैटरर्स, टेंट हाउस ऑपरेटर, मेहमान और धार्मिक नेता जैसे सेवा प्रदाता जो बाल विवाह कराने में शामिल होते हैं, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
सरकार की नई पहल का स्वागत करते हुए 'रियल' के निदेशक एस रामा राव ने कहा कि चुने हुए प्रतिनिधियों, सरकारी मशीनरी, कानून लागू करने वाली एजेंसियों और कम्युनिटी की भागीदारी का एक साथ आना भारत में बाल विवाह को खत्म करने की कोशिशों में बड़ा बदलाव लेकर आयेगा।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित