नयी दिल्ली , अक्टूबर 07 -- इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के स्वतंत्र व्यावसायिक प्रभाग इंडिया एआई ने 'सुरक्षित और विश्वसनीय एआई' के दूसरे दौर में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों द्वारा तैयार पांच परियोजनाओं का चयन किया है।

मंत्रालय ने मंगलवार को एक विज्ञप्ति में कहा कि एआई प्रौद्योगिकियां जिस प्रकार से अभूतपूर्व गति से विकसित हो रही हैं, उनका सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय उपयोग सुनिश्चित करना राष्ट्र के लिए जरूरी हो गया है। स्वदेशी शासन उपकरण, ढांचे और दिशा-निर्देश विकसित करने के उद्देश्य से चुस्त और मजबूत तंत्र को बढ़ावा देने के लिए इंडियाएआई ने 10 दिसंबर 2024 को कई महत्वपूर्ण विषयों पर 'सुरक्षित और विश्वसनीय एआई' स्तंभ के तहत रुचि की अभिव्यक्ति (ईओआई) का दूसरा दौर शुरू किया था।

इसके अंतर्गत प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों, स्टार्ट-अप्स, अनुसंधान संगठनों और नागरिक समाज से 400 से अधिक प्रस्ताव प्राप्त हुये। प्रस्तावों के मूल्यांकन के लिए तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान करने के उद्देश्य से विभिन्न क्षेत्रों के हितधारकों की एक समिति का गठन किया गया।

मंत्रालय ने बताया कि रुचि की अभिव्यक्ति (ईओआई) के दूसरे दौर के अंतर्गत विभिन्न विषयों पर पांच परियोजनाओं का चयन किया गया है।

डीफफेक का पता लगाने के लिए विकसित तीन टूल को इसमें जगह मिली है। इनमें एक परियोजना आईआईटी खड़गपुर की है। दूसरी परियोजना आईआईटी जोधपुर और आईआईटी मद्रास ने संयुक्त रूप से तैयार की है। तीसरी परियोजना आईआईटी मंडी और हिमाचल प्रदेश फॉरेंसिक सेवा निदेशालय द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गयी है।

'डिजिटल फ्यूचर लैब' और 'कार्य' ने मिलकर कृषि एलएलएम के क्षेत्र में लैंगिक पक्षपात को कम करने के लिए एक टूल विकसित किया है।

एक अन्य चयनित परियोजना आईआईआईटी धारवाड़ और ग्लोबल्स आईटीईएस प्राइवेट लिमिटेड की है जिसमें एलएलएम और सृजनात्मक एआई की उपलब्धता और उसके आंकलन के लिए टूल विकसित किया गया है।

मंत्रालय ने बताया कि इन परियोजनाओं से यह सुनिश्चित होगा कि देश में उपयोग में लायी जाने वाली एआई प्रणालियां विश्वसनीय, सुरक्षित और समावेशी हों। इंडियाएआई मिशन अग्रणी शैक्षणिक संस्थानों, उद्योग भागीदारों और नागरिक समाज को एक साथ लाकर नवाचार, नैतिक प्रथाओं और एआई के लिए सामर्थ्यवान और अनुकूल परिवेश को बढ़ावा देना जारी रखेगा जिससे देश की विविध प्रकार की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सकेगा।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित