नयी दिल्ली , जनवरी 20 -- भारतीय रेलवे अपनी 'वन स्टेशन वन प्रोडक्ट' (ओएसओपी) योजना के जरिये शिल्पकला से जुड़े कारीगरों को सशक्त बनाने का काम कर रही है। यह योजना स्थानीय शिल्पकला को बढ़ावा देने के लिए एक शक्तिशाली मंच के रूप में उभरी है।
रेलवे की ओर से मंगलवार को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार ओएसओपी योजना 2,000 से ज़्यादा रेलवे स्टेशनों तक फैली है और 1.32 लाख कारीगरों को सशक्त बना रही है तथा लाखों यात्रियों तक सीधी बाज़ार पहुंच के ज़रिए भारत की पारंपरिक शिल्पकला को पुनर्जीवित कर रही है। यह योजना देशभर में जमीनी स्तर पर उद्यमिता को बढ़ावा दे रही है। इस पहल का मकसद रेलवे स्टेशनों को भारत की समृद्ध क्षेत्रीय विविधता के जीवंत प्रदर्शन केंद्र में बदलना है।
रेलवे ने कहा है कि स्थानीय विरासत को राष्ट्रीय रेलवे नेटवर्क के साथ जोड़कर ओएसओपी योजना न केवल यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाती है बल्कि समावेशी आर्थिक विकास को भी बढ़ावा देती है। रेलवे के अनुसार 19 जनवरी तक 2,002 स्टेशनों पर ओएसओपी आउटलेट स्थापित किए गए हैं, जिनमें कुल 2,326 आउटलेट चालू हैं। ये आउटलेट हजारों स्थानीय कारीगरों, बुनकरों और छोटे उत्पादकों के लिए आजीविका का स्रोत बन गए हैं, जिनका अब हर दिन लाखों यात्रियों के साथ सीधा संपर्क है। इसके अलावा, 2022 में ओएसओपी की शुरुआत के बाद से, इस पहल ने पूरे भारत में 1.32 लाख से ज़्यादा लाभार्थियों के लिए सीधे आर्थिक अवसर पैदा किए हैं।
रेलवे ने कहा कि ओएसओपी योजना पारंपरिक शिल्पकला और क्षेत्रीय विशिष्टताओं को पुनर्जीवित करने में मदद कर रही है जो कभी अपनी पहचान खो रही थीं। पूर्वोत्तर में हस्तनिर्मित मिट्टी के बर्तन और बांस के काम से लेकर अन्य क्षेत्रों में मसालों, हथकरघा और स्थानीय मिठाइयों तक, ये उत्पाद यात्रियों के लिए हर क्षेत्र का सार लाते हैं।
वहीं, वाणिज्य को संस्कृति के साथ एकीकृत करके, भारतीय रेलवे ने स्टेशनों को स्थानीय उद्यम के केंद्र में बदल दिया है। 'वन स्टेशन वन प्रोडक्ट' पहल 'वोकल फॉर लोकल' का एक सच्चा उदाहरण है, जो समुदायों को सशक्त बनाता है और पूरे देश में यात्रियों के यात्रा अनुभव को समृद्ध करता है।
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