नयी दिल्ली , दिसंबर 8 -- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि वंदे मातरम् को गाते हुए आजादी के दीवाने फांसी के फंदे पर झूल जाते थे और इस गीत की गूंज ने अंग्रेजों की नींद उड़ा दी थी लेकिन कांग्रेस तुष्टीकरण के लिए मुस्लिम लीग के समक्ष झुक गयी और इस गीत के टुकड़े कर दिये।
वंदे मातरम् की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में लोक सभा में विशेष चर्चा की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में राष्ट्र भक्ति का मंत्र बना यह प्रेरक गीत स्वतंत्र भारत के भविष्य का भी सपना है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जो वंदे मातरम 1905 में महात्मा गांधी को नेशनल एंथम के रूप में दिखता था, जो देश प्रेमियों को बल प्रदान करता था, उसके खिलाफ मुस्लिम लीग के नेता मोहम्मद अली जिन्ना ने 15 अक्टूबर 1937 को लखनऊ में नारा बुलंद कर दिया । कांग्रेस पार्टी के तत्कालीन अध्यक्ष जवाहर लाल नेहरू ने जिन्ना के बयानों का तगड़ा जवाब देने के बजाय पांच दिन बाद नेताजी सुभाष चंद्र बोस को चिठ्ठी लिख कर जिन्ना की भावना का समर्थन करते हुए लिखा कि 'वंदे मातरम् की आनंद मठ वाली पृष्ठभूमि मुसलमानों को इरिटेट कर (चिढ़ा) सकती है।"श्री मोदी ने कहा, "नेहरू जी कहते हैं, मैंने वंदे मातरम गीत का बैकग्राउंड पढ़ा है।" नेहरू जी फिर लिखते हैं, "मुझे लगता है कि यह जो बैकग्राउंड है, इससे मुस्लिम भड़केंगे।" उसके बाद कांग्रेस ने 26 अक्टूबर को कांग्रेस कार्यसमिति में इस गीत के उपयोग की समीक्षा करने का बयान दे दिया था। देश भर में इसके विरोध के बावजूद कांग्रेस ने उस बैठक में वंदे मातरम् के साथ समझौता कर लिया। पार्टी के फैसले के बाद इस गीत के टुकड़े कर दिए।
प्रधानमंत्री ने कहा, 'उस फैसले को चोला यह पहनाया गया कि यह तो सामाजिक सद्भाव का काम है। लेकिन इतिहास इस बात का गवाह है कि कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के सामने घुटने टेक दिए और मुस्लिम लीग के दबाव में किया और कांग्रेस का यह तुष्टीकरण की राजनीति को साधने का एक तरीका था।"उन्होंने कहा, ' तुष्टीकरण की राजनीति के दबाव में कांग्रेस वंदे मातरम के बंटवारे के लिए झुकी, इसलिए कांग्रेस को एक दिन भारत के बंटवारे के लिए झुकना पड़ा।... आज भी कांग्रेस और उसके साथी और जिन-जिन के नाम के साथ कांग्रेस जुड़ा हुआ है सब, वंदे मातरम पर विवाद खड़ा करने की कोशिश करते हैं।"श्री मोदी ने कहा कि वंदे मातरम् की यात्रा की शुरुआत बंकिम चंद्र जी ने 1875 में की थी और यह गीत ऐसे समय लिखा गया था, जब 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के बाद अंग्रेज सल्तनत बौखलाई हुई थी। उनके 1882 में लिखे उपन्यास आनंद मठ में इसका समावेश किया गया।
श्री मोदी ने कहा, " आजाद भारत के सपने को सींचा था वंदे भारत की भावना ने, समृद्ध भारत के सपने को सींचेगी वंदे मातरम् की भावना, उन्हीं भावनाओं को लेकर के हमें आगे चलना है। हमें आत्मनिर्भर भारत बनाना है और 2047 में देश विकसित भारत बन कर रहेगा।"श्री मोदी ने कहा, " जिसने वंदे मातरम जैसी पवित्र भावना को भी विवादों में घसीट दिया। मैं समझता हूं कि आज जब हम वंदे मातरम के 150 वर्ष का पर्व बना रहे हैं, यह चर्चा कर रहे हैं, तो हमें उन परिस्थितियों को भी हमारी नई पीढ़ियां को जरूर बताना हमारा दायित्व है, जिसकी वजह से वंदे मातरम के साथ विश्वासघात किया गया।" उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् सिर्फ गीत या भाव गीत नहीं बल्कि जो हमारे लिए प्रेरणा है और हमें राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों के लिए झकझोरने वाला स्वर है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित