नयी दिल्ली , दिसंबर 07 -- राजधानी दिल्ली में आयोजित हुए सरस फूड फेस्टिवल 2025 में दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की सफलता तब स्पष्ट रूप से दिखाई दी जब इस साल मेले में 25 राज्यों से लगभग 300 'लखपति दीदी' और स्वयं सहायता समूह उद्यमी भाग लेने पहुँचीं। इतनी बड़ी संख्या में इन महिला उद्यमियों का भाग लेना ग्रामीण भारत में आजीविका और सशक्तिकरण की एक बड़ी सफलता है।

मेले के आकर्षण का केंद्र मोहाली, पंजाब की वंदना भारद्वाज रहीं। श्रीमती भारद्वाज अपनी आकर्षक और खास तरह की कढ़ाई 'फुलकारी' को लेकर आयीं थीं। उन्होंने साल 2018 में मात्र दस महिलाओं के एक छोटे स्वयं सहायता समूह से शुरुआत की थी। वह आज 25 गाँवों में 500 से अधिक स्वयं सहायता समूह का नेतृत्व करती हैं। उन्होंने बताया कि ग्रामीण विकास मंत्रालय से मिली सिलाई मशीनें और 30,000 की कार्यशील पूंजी जैसी मदद ने उनके उद्यम को बदल दिया। उनके नेतृत्व में ये समूह अब स्वेटर, स्कूल यूनिफॉर्म और उच्च गुणवत्ता वाले फुलकारी कपड़े बनाते हैं। इनकी खरीद सरकारी विभाग राष्ट्रीय और विदेशी गणमान्य व्यक्तियों को उपहार देने के लिये होती है। ।

ओडिशा के 'माँ' नाम के स्वयं सहायता समूह की एक सदस्य ने बताया कि इस समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आसान कर्ज और सरकारी अधिकारियों से नियमित मदद मिली। उन्होंने गर्व से बताया कि उन्होंने पिछले सरस मेले में पांच लाख के इकत सूती कपड़ों की बिक्री दर्ज की थी। इकत ओडिशा की खास छपाई का नाम है। यहां की महिला उद्यमियों की डिजिटल दक्षता उल्लेखनीय थी। ओडिशा की सदस्य ने बताया कि वह खरीदारों के साथ बातचीत के दौरान भाषा बाधाओं को दूर करने के लिए भाषिनी मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग कर रही थीं।

बिहार के सहरसा की माया देवी ने साल 2014 में केवल 10 रुपये की साप्ताहिक बचत से शुरुआत की थी। वह अब मखाना उत्पादों का एक सफल उद्यम चला रही हैं।

इसी तरह, गुजरात के जूनागढ़ की दक्षा मेहता ने सरस मेले के माध्यम से पांच लाख से अधिक की बिक्री की और अपने उत्पादों को ई-कॉमर्स की दुनिया में लेकर आयीं।

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