हैदराबाद , नवंबर 16 -- वरिष्ठ पत्रकार देवुलपल्ली अमर ने कहा कि मीडिया की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए एक स्वैच्छिक, गैर-सरकारी प्रेस परिषद की आवश्यकता है। वह रविवार को नामपल्ली स्थित अकादमी के सभागार में सूचना एवं जनसंपर्क विभाग और तेलंगाना मीडिया अकादमी द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित राष्ट्रीय प्रेस दिवस कार्यक्रम में बोल रहे थे।
श्री अमर ने कहा कि पत्रकारिता के नाम पर चल रही अनैतिक कार्यों को उजागर करने की तत्काल आवश्यकता है। तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के मार्गदर्शन में 16 नवंबर, 1966 को प्रथम प्रेस आयोग और भारतीय प्रेस परिषद के गठन को याद करते हुए, उन्होंने कहा कि उस उपलब्धि के सम्मान में हर साल राष्ट्रीय प्रेस दिवस मनाया जाता है।
श्री अमर ने कहा कि कुछ समाचार पत्र और टेलीविजन चैनल मालिक नैतिक मानदंडों के विपरीत गलत जानकारी प्रसारित करके पूरे मीडिया को बदनाम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसका मुकाबला करने के लिए, मीडिया संगठनों को बिरादरी के भीतर असुरक्षा को दूर करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने केंद्र और राज्यों से सोशल मीडिया के नियमन के लिए कानूनी दिशानिर्देश बनाने और पत्रकारों पर हमलों को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने का भी आग्रह किया।
भारतीय प्रेस परिषद को एक व्यापक भारतीय मीडिया परिषद में बदलने का आह्वान करते हुए श्री अमर ने बताया कि भारतीय प्रेस परिषद दो वर्षों से बिना किसी शासी निकाय के काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इसे तुरंत पुनर्गठित किया जाना चाहिए और प्रेस की स्वतंत्रता, नैतिकता और जवाबदेही की निगरानी करने तथा उल्लंघनों के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए सशक्त बनाया जाना चाहिए।
विभिन्न पत्रकार संघों के प्रतिनिधियों श्री मारुति सागर, श्री माजिद, श्री बसव पुन्नैया, श्री रमण राव, श्री रंगसाई, श्री यूसुफ बाबू, श्री रमण कुमार और सुवर्णा ने पत्रकारों के कल्याण के लिए अपने सुझाव साझा किए।
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