भागलपुर , दिसंबर 06 -- बिहार के भागलपुर जिले में अवस्थित एनटीपीसी के कहलगांव बिजली परियोजना में शनिवार को केन्द्रीय विद्युत मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय तापीय विद्युत संयंत्रों में बायोमास उपयोग को बढ़ावा देने के लिये "बायोमास को-फायरिंग" विषय पर एक दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
भागलपुर के जिलाधिकारी डॉ.नवल किशोर चौधरी एवं परियोजना प्रमुख रविन्द्र पटेल ने कार्यशाला का शुभारंभ किया। कार्यशाला का उद्देश्य एनटीपीसी के ताप विद्युत संयंत्रों में बायोमास के सह-फायरिंग को प्रोत्साहित करना, फसल अवशेषों के वैज्ञानिक प्रबंधन को सुदृढ़ बनाना तथा पराली जलाने की समस्या को कम करते हुए स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देना है।
जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने कहा कि बायोमास को-फायरिंग पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ किसानों की आय में वृद्धि तथा सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने का एक व्यावहारिक और प्रभावी माध्यम है। इस प्रकार की कार्यशालाएं किसानों, उद्योगों एवं प्रशासन के बीच सशक्त समन्वय स्थापित करती हैं तथा पराली जलाने जैसी गंभीर समस्या के स्थायी समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
कहलगांव परियोजन के प्रमुख रविन्द्र पटेल ने कहा कि एनटीपीसी देश की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण एवं ग्रामीण विकास के लिए भी निरंतर प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि बायोमास को-फायरिंग जैसे प्रयास भारत को स्वच्छ, हरित एवं आत्मनिर्भर ऊर्जा की दिशा में आगे ले जाने में सहायक सिद्ध होंगे।
कार्यशाला के दौरान बायोमास को-फायरिंग से जुड़े तकनीकी, पर्यावरणीय एवं आर्थिक पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने जानकारी दी कि बायोमास आधारित ईंधन के उपयोग से जहां कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आती है, वहीं किसानों को फसल अवशेषों का उचित मूल्य प्राप्त होता है तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होते हैं।
विशेषज्ञों ने कहा कि यह कार्यक्रम बायोमास आधारित स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं प्रभावी मंच सिद्ध होगा।
इस मौके पर जिला कृषि पदाधिकारी शंकर प्रसाद, परियोजना के महाप्रबंधक सर्वश्री मनोरंजन परिदा, श्रीनाथ मारिसेठ्ठी , मनोरंजन सारंगी, भास्कर गुप्ता सहित भागलपुर और गोड्डा जिलों के बड़ी संख्या में किसान एवं उद्यमी मौजूद थे।
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