नयी दिल्ली , जनवरी 02 -- कैबिनेट सचिव टी वी सोमनाथन ने विकास परियोजनाओं और कल्याणकारी योजनाओं के समय से क्रियान्वयन में सरकार की 'प्रगति' पहल की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा है कि इसके माध्यम से दशकों से लटकी पड़ी परियोजनाओं को पूरा किया गया है और इनसे संबंधित 7735 मुद्दों में से 7156 का समाधान किया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई 'प्रगति' की 50 वीं बैठक के बाद शुक्रवार को यहां एक संवाददाता सममेलन में इस पहल की पिछले एक दशक में हुई बैठकों की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि यह परियोजनाओं की समस्याओं का जल्द पता लगाने तथा उनका समाधान कर तेजी से अमल में लाने का प्लेटफार्म है। इस अवसर पर उनके साथ रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष सतीश कुमार, ऊर्जा सचिव पंकज अग्रवाल, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय में सचिव वी. उमाशंकर, व्यय सचिव मनोज गोविल और सूचना एवं प्रसार सचिव संजय जाजू भी मौजूद थे।

उन्होंने कहा कि 500 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं की ही 'प्रगति' में समीक्षा की जाती है और इसमें कई चरणों में समस्याओं का समाधान किया जाता है। यदि समस्याओं का समाधान नहीं होता है तो इसे सबसे अंतिम चरण में समाधान के लिए सीधे प्रधानमंत्री के स्तर तक पहुंचाया जाता है। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में 36 क्षेत्रों की परियोजनाओं से जुड़ी 7735 समस्याओं में से 7156 का प्रगति के माध्यम से समाधान किया है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि तीन हजार से अधिक परियोजनाओं में से अब तक 382 परियोजनाओं को प्रधानमंत्री की समीक्षा के लिए भेजा गया और इनसे संबंधित 3187 समस्याओं में से 2958 का समाधान किया गया। इनमें से 42 प्रतिशत जमीन अधिग्रहण और 19 प्रतिशत वन और वन्यजीव से संबंधित थी। यह कुल परियोजनाओं का दस प्रतिशत से अधिक है और इसका मतलब है कि औसतन हर रोज एक परियोजना का निपटारा किया गया।

उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में प्रगति की बैठकों में रेलवे से संबंधित 416 परियोजनाओं के 885 में से 803 मुद्दों का समाधान किया गया । इसी तरह सड़क , परिवहन और राजमार्ग की परियोजनाओं से संबंधित 1463 परियोजनाओं के 2095 मुद्दों में से 1968 का समाधान हुआ। ऊर्जा क्षेत्र की 416 परियोजनाओं की 885 में से 803 समस्याओं का समाधान किया गया।

उन्होंने कहा कि प्रगति पूरी तरह से गैर राजनीतिक मंच है और इसमें किसी राज्य के साथ भेदभाव नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि राज्यों की ओर से भी बेहतर सहयोग और तालमेल मिलता है।

परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण की समस्याओं के मद्देनजर एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि कानून में बदलाव की कोई योजना नहीं है हां इससे संबंधित प्रक्रिया के लिए अधिकारियों को नये सिरे से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विस्तृत परियोजना रिपोर्ट की प्रक्रिया में भी समाधान किया जा रहा है। वनीकरण के लिए जमीनों की पहचान कर एक तरह से उनका बैंक भी बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वनों से संबंधित मंजूरी के लिए 75 दिन की समय सीमा शुरू किये जाने पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रगति की बैठकों में 61 प्रतिशत जनकल्याणकारी योजनाओं की भी समीक्षा की गयी।

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