लखनऊ , जनवरी 06 -- लखनऊ में साइबर क्राइम पुलिस ने फर्जी पुलिस और एनआईए/एटीएस अधिकारी बनकर लोगों को 'डिजिटल अरेस्ट' में रखने के नाम पर ठगी करने वाले संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है।

इस गिरोह ने एक सेवानिवृत्त सरकारी पेंशनर से 54 लाख 60 हजार रुपये की साइबर ठगी की थी। पुलिस ने मामले में चार अभियुक्तों को गिरफ्तार करते हुए उनके कब्जे से 34,334 रुपये नकद, पांच मोबाइल फोन, सात एटीएम कार्ड,दो चेक, पैन कार्ड, आधार कार्ड और तीन फर्जी प्रेस आईडी कार्ड बरामद किए हैं।

पुलिस के अनुसार पीड़ित राजेन्द्र प्रकाश वर्मा, सेवानिवृत्त राजकीय पेंशनर, को बीते 13 दिसंबर को साइबर ठगों ने व्हाट्सएप वीडियो कॉल के माध्यम से संपर्क किया। अभियुक्तों ने स्वयं को पुलिस इंस्पेक्टर और एनआईए/एटीएस अधिकारी बताकर पीड़ित पर आतंकी फंडिंग और फर्जी बैंक खातों के जरिए सात करोड़ रुपये के अवैध लेन-देन का झूठा आरोप लगाया।

इसके बाद पीड़ित को 'डिजिटल अरेस्ट' का भय दिखाकर लगातार ऑनलाइन निगरानी में रखा गया और जांच के नाम पर दबाव बनाकर उनके एसबीआई खाते से दो अलग-अलग खातों इंडसइंड बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा में कुल 54.60 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए।

इस संबंध में थाना साइबर क्राइम लखनऊ में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं एवं सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(डी) में मुकदमा दर्ज किया गया। मामले के अनावरण के लिए अमरेंद्र कुमार सेंगर तथा अमित वर्मा के निर्देशन में साइबर क्राइम थाना की विशेष टीम गठित की गई, जिसने सफलतापूर्वक अभियुक्तों की गिरफ्तारी की।

पूछताछ में अभियुक्तों ने स्वीकार किया कि वे संगठित गिरोह के रूप में कार्य करते थे। गिरोह के कुछ सदस्य फर्जी अधिकारी बन कर कॉल करते थे, जबकि अन्य सदस्य गरीब और अनभिज्ञ लोगों को लालच देकर उनके बैंक खाते, एटीएम और चेकबुक हासिल करते थे। ठगी की रकम को इन 'म्यूल खातों' में डालकर बार-बार रूट किया जाता था, ताकि ट्रेस न किया जा सके।

गिरफ्तार अभियुक्तों में मो. सूफियान थाना वजीरगंज लखनऊ, मो. आज़म पुत्र थाना दुबग्गा लखनऊ, उजैर खान थाना मदेयगंज व आरिफ इकबाल आदिल नगर शामिल है।

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