बैतूल , जनवरी 06 -- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में साइबर अपराधियों ने ठगी के लिए "डिजिटल अरेस्ट" का जाल फैलाते हुए खुद को दिल्ली पुलिस अधिकारी बता कर एक बुजुर्ग से 23.50 लाख रुपए की बड़ी साइबर ठगी को अंजाम दिया।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि फरियादी बसंत कुमार मैदमवार (80) एसबीआई बैंक से हेड कैशियर पद से सेवानिवृत्त हैं, को 27 नवंबर 2025 को एक व्हाट्सएप वीडियो कॉल आया। कॉल की स्क्रीन पर दिल्ली पुलिस लिखा हुआ था। कॉल करने वाले व्यक्ति ने बताया कि फरियादी के आधार कार्ड से दिल्ली में एक सिम कार्ड लिया गया है, जिसका उपयोग ब्लैकमेलिंग और मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है। ठगों ने यह भी कहा कि उनके खिलाफ दिल्ली क्राइम ब्रांच में एफआईआर दर्ज है और उन्हें "डिजिटल अरेस्ट" किया गया है। लगातार वीडियो कॉल और गिरफ्तारी की धमकी से भयभीत बुजुर्ग से खातों की "जांच" के नाम पर पैसे ट्रांसफर करवा लिए गए। विभिन्न बैंक खातों से कुल 23.50 लाख रुपए की ठगी की गई। दो दिसंबर को जब फरियादी गोल्ड लोन लेने बैंक पहुंचे, तब बैंक प्रबंधक ने पूरे मामले को साइबर ठगी बताया। इसके बाद फरियादी ने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई।
थाना गंज में अपराध क्रमांक 04/26, धारा 318(4), 308 बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस संबंधित बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल साक्ष्यों की तकनीकी जांच कर रही है।
इसी बीच पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन ने स्पष्ट किया कि डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई भी कानूनी प्रक्रिया नहीं है। कोई भी जांच एजेंसी फोन या व्हाट्सएप पर पैसे ट्रांसफर करने को नहीं कहती। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि अनजान कॉल से न डरें, व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें और ठगी की आशंका होने पर तुरंत 1930 पर शिकायत करें।
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