'कोसी के चाणक्य' बिजेंद्र प्रसाद यादव पहली बार बने उप मुख्यमंत्री पटना , अप्रैल 15 -- बिहार की राजनीति का मजबूत स्तंभ और 'कोसी के चाणक्य' कहे जाने वाले बिजेंद्र प्रसाद यादव ने पहली बार राज्य में उप मुख्यमंत्री बने।

श्री यादव का जन्म 10 अक्टूबर 1946 को सुपौल जिले के सरायगढ़ भपटियाही प्रखंड के मुरली गांव में हुआ। उनके पिता स्वर्गीय सुखराम यादव किसान थे। बिजेंद्र प्रसाद यादव ने वर्ष 1965 में वीरपुर स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की। वर्ष 1990 में जनता दल के टिकट पर वह पहली बार सुपौल के विधायक बने। इसके बाद से उन्होंने लगातार 1995,2000,2005 फ़रवरी 2005 अक्टूबर ,2010,2015, 2020 और 2025 में सुपौल से चुनाव जीता है। सुपौल विधानसभा सीट से लगातार नौ बार विधायक चुने गए। अजेय योद्धा बिजेंद्र प्रसाद यादव अब बिहार की नई सरकार में उपमुख्यमंत्री बनाए गए हैं।

श्री यादव अपने लंबे राजनीतिक अनुभव, सादगी और मजबूत प्रशासनिक पकड़ के लिए जाने जाते हैं। उनके समर्थक उन्हें "कोसी का विश्वकर्मा" भी कहते हैं, क्योंकि उनके नाम क्षेत्र के विकास कार्यों को लेकर कई उपलब्धियां जुड़ी हैं। श्री यादव 1990 से अब तक विभिन्न सरकारों लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, नीतीश कुमार और जीतन राम मांझी की कैबिनेट में मंत्री रहे हैं।

श्री यादव एक समय लालू प्रसाद यादव के राइट हैंड माने जाते थे। वर्ष 1997 में जब जनता दल में टूट हुयी, तो उन्होंने शरद यादव का साथ दिया और मंत्री पद त्याग दिया। वर्ष 2000 में श्री यादव ने जनता दल यूनाईटेड (जदयू) के टिकट पर सुपौल विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की।इसके बाद उन्होंने लगातार इस सीट से जीत दर्ज की है। जदयू को मजबूती प्रदान करने में बिजेंद्र यादव ने अहम भूमिका निभाई। 2005 का चुनाव पार्टी इन्हीं की अगुआई में लड़ी। उस वक्त वह पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हुआ करते थे।

नीतीश कुमार सरकार बिजेंद्र यादव का सबसे स्मरणीय योगदान ऊर्जा विभाग के मंत्री के तौर पर रहा है।नीतीश कुमार ने जब बिहार के गांवों को रोशन करने का संकल्प लिया, तो उन्होंने इसकी कमान अपने सबसे भरोसेमंद साथी बिजेंद्र यादव को सौंपी।उन्होंने न केवल इस चुनौती को स्वीकार किया, बल्कि तय समय सीमा के भीतर बिहार के सुदूर इलाकों तक बिजली पहुंचाकर राज्य की तस्वीर बदल दी। वर्ष 2008 में कोसी नदी की कुशहा त्रासदी के दौरान तटबंध टूटने से भारी तबाही हुई थी। उस समय बिजेंद्र यादव जल संसाधन मंत्री थे। स्थिति नियंत्रित न होने पर उन्होंने नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दिया। बाद में जांच आयोग ने उन्हें क्लीन चिट दे दी।श्री यादव अपनी कार्यशैली एवं निष्ठा की बदौलत 35 वर्षो से सत्ता के शीर्ष पर रहे हैं और अनंत सफर इस पारी में भी जारी है। वर्ष 1990 में पहली बार विधान सभा चुनाव जीतने के बाद उन्होंने कभी हार का मुंह नहीं देखा। सरकार की हर पारी में इन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलती रही।बिजेंद्र प्रसाद यादव की सबसे बड़ी शक्ति उनका अटूट जनाधार है।उन्होंने खुद को एक वर्ग विशेष के नेता के बजाये सर्वसमाज के नेता के रूप में स्थापित किया है।

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