राजकोट , जनवरी 11 -- गुजरात में दो दिवसीय वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस (वीजीआरसी) अंतर्गत रविवार को यहां 'कार्बन से फसल तक, हरित अणु, अधिक उत्पादन' विषय पर परिसंवाद आयोजित हुआ।
इस परिसंवाद का मुख्य उद्देश्य वर्तमान परिप्रेक्ष्य में वैश्विक जलवायु परिवर्तन तथा बढ़ती जा रही खाद्यान्न की मांग के बीच कृषि क्षेत्र के लिए नवीन एवं टिकाऊ उपयोग और हरित ऊर्जा की ओर प्रयास अत्यंत महत्वपूर्ण बने हैं। कार्बन से फसल तक की विचारधारा ऐसा नूतन दृष्टिकोण है, जिसमें हवा में रहे कार्बन डाइऑक्साइड या उद्योगों से निकलने वाले कार्बन का उपयोग कर खेती के लिए उपयोगी हरित अणु (ग्रीन मोलेक्यूलस) तैयार किए जाते हैं।
परिसंवाद में विभिन्न वक्ताओं द्वारा बताया गया कि हरित ऊर्जा संबंधी प्रयासों तथा भविष्य में कैसे प्रयास किए जा सकते हैं तथा कार्बन को जिम्मेदारी नहीं, बल्कि अवसर के रूप में देखकर ग्रीन एनर्जी का स्रोत बनाना चाहिए। इसके अलावा, हरित अणुओं का उपयोग जैव उर्वरक, बायोस्टिम्युलेंट्स, मिट्टी सुधारक तत्व तथा फसल वृद्धि प्रोत्साहक के रूप में होता है। परिणामस्वरूप जमीन की उपज क्षमता में वृद्धि होती है और फसल की जड़ मजबूत बनती है तथा पौधे में पोषक तत्वों का शोषण अधिक प्रभावशाली बनता है।
कार्बन आधारित हरित अणुओं के उपयोग से फसल का उत्पादन उल्लेखनीय रूप से बढ़ता है, रासायनिक खाद पर निर्भरता घटती है, जमीन का स्वास्थ्य एवं जीवंतता बने रहते हैं, पानी के उपयोग में कार्यक्षमता बढ़ती है, कृषि अधिक पर्यावरणीय संतुलित तथा टिकाऊ बनती है। यह दृष्टिकोण केवल कृषि उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि कार्बन उत्सर्जन घटाने, जलवायु परिवर्तन से लड़ने और किसानों की आय में वृद्धि करने के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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