नयी दिल्ली , जनवरी 13 -- राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मंगलवार को कामानी ऑडिटोरियम में 'फेस्टिवल ऑफ़ न्यू कोरियोग्राफ़ीज़-कला यात्रा 2026' का भव्य शुभारंभ हुआ। दिल्ली सरकार द्वारा प्रस्तुत और पद्म विभूषण से सम्मानित प्रख्यात नृत्यांगना डॉ. सोनल मानसिंह की परिकल्पना व क्यूरेशन में आयोजित यह पाँच दिवसीय महोत्सव भारतीय शास्त्रीय नृत्य की समकालीन अभिव्यक्तियों का एक सशक्त मंच बनकर उभरा।

यह महोत्सव दिल्ली सरकार के कला, संस्कृति एवं भाषा विभाग तथा सेंटर फ़ॉर इंडियन क्लासिकल डांसेज़ (श्री कामाख्या कलापीठ) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। इसमें देश की दस प्रतिष्ठित नृत्य संस्थाएँ भाग ले रही हैं, जो अपनी नई, प्रयोगधर्मी और विचारप्रधान कोरियोग्राफ़ियों के माध्यम से शास्त्रीय नृत्य की विकसित होती भाषा को दर्शकों के सामने प्रस्तुत कर रही हैं।

उद्घाटन संध्या पर कामानी ऑडिटोरियम इस बात का प्रमाण बना कि भारतीय शास्त्रीय नृत्य आज भी दर्शकों से गहरे स्तर पर जुड़ता है। महोत्सव की शुरुआत डॉ. सोनल मानसिंह द्वारा संकल्पित और निर्देशित भव्य नृत्य-नाट्य 'अमृत-मंथन' से हुई। समुद्र मंथन की पौराणिक कथा पर आधारित इस प्रस्तुति में सद्-असद्, धर्म-अधर्म और मानवीय संघर्षों को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से मंचित किया गया। सशक्त भाव-भंगिमा, कलात्मक मंच सज्जा और गहन नाट्य प्रभाव ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और अंत में सभागार तालियों से गूंज उठा।

इस अवसर पर डॉ. सोनल मानसिंह ने दिल्ली सरकार के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जब शासन और संस्कृति एक साथ आगे बढ़ते हैं, तभी परंपरा को सम्मान और नवाचार को नई दिशा मिलती है। उन्होंने कहा कि नई कोरियोग्राफ़ी अतीत की स्मृति और वर्तमान की संवेदना के बीच संवाद स्थापित करती है।

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