अलवर , फरवरी 25 -- राजस्थान के अलवर में होली के अवसर पर वन विभाग जैविक उत्पाद हर्बल गुलाल बाजार में बेचेगा।
शाहपुरा डेरा के वनपाल मदनलाल ने बताया कि इस बार समीपवर्ती शाहपुर डेहरा के पास चूहड़ सिद्ध के आसपास पलाश के फूलों से पांच क्विंटल हर्बल गुलाल तैयार कराया जा रहा है। अलवर में चूहड़ सिद्ध के जंगलों में पलाश के पेड़ों पर फूल विपुल मात्रा में होते हैं। यहीं से गुलाल बनाने का विचार उत्पन्न हुआ।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में तत्कालीन वन अधिकारी अपूर्व श्रीवास्तव ने यह प्रयास शुरू किया था जो अब एक अभियान बन चुका है। प्रत्येक वर्ष होली पर वन विभाग हर्बल गुलाल तैयार कराता है।
श्री मदनलाल ने बताया कि राजस्थान में सबसे पहले उदयपुर में इस तरह का गुलाल तैयार किया जा रहा था। यहीं से वन अधिकारी अपूर्व श्रीवास्तव के मन में अलवर में इसी तरह के गुलाल के उत्पादन का विचार उत्पन्न हुआ। उन्होंने प्रशिक्षण के लिए वन कर्मियों को उदयपुर भेजा। प्रशिक्षण के बाद वन कर्मियों ने अलवर में आकर वर्ष 2022 में सबसे पहले एक क्विंटल हर्बल गुलाल तैयार कराया। मांग बढ़ने के चलते इसकी मात्रा हर वर्ष बढ़ती गई।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष पांच क्विंटल हर्बल गुलाल तैयार कराया जा रहा है जो 200 ग्राम के पैकेट में बेचा जायेगा। इसकी खास बात यह है कि ज्यादातर गुलाल पलाश के फूलों से तैयार किया जा रहा।
श्री मदनलाल ने बताया कि वर्ष 2022 में वन अधिकारी रहे अपूर्व श्रीवास्तव ने उदयपुर प्रशिक्षण के लिए भेजा था। इस बार वन अधिकारी राजेंद्र कुमार हुड्डा द्वारा वन कर्मियों का उत्साहवर्द्धन करते हुए इसकी मात्रा बढ़ाकर पांच क्विंटल करा दी। इस कार्य में महिलाएं कार्यरत हैं।
उन्होंने बताया कि शाहपुर डेहरा में महिलाएं गुलाल तैयार कर रही हैं। अमृतवास और चूहड़ सिद्ध के जंगलों में पलाश सहित अन्य फूल, नीम की पत्तियां इकट्ठे किए जाते हैं फिर उनको सुखाया जाता है। पलाश के फूल मार्च- अप्रैल में आते हैं। उनको इकट्ठा करके पानी में उबला जाता जाता है। उनका पानी तैयार करते हैं फिर उसमें अरारोट डालकर गुलाल तैयार की जाती है।
श्री मदनलाल ने बताया कि अलवर में बकायदे इसके लिए स्थानीय स्तर पर एक हर्बल गुलाल समिति 11 महिलाओं ने बनाई है जिसके बैनर तले काम हो रहा है। यह गुलाल किसी फैक्ट्री में नहीं बल्कि महिला अपने हाथों से तैयार कर रही हैं। अलवर वन मंडल द्वारा 200 ग्राम के पैकेट बनाए जाते हैं। पहले यह 50 रुपये में बेचे जाते थे, लेकिन बढ़ती महंगाई के चलते अलवर में अब इसे 60 रुपये प्रति पैकेट बेचे जाएंगे ।
उन्होंने बताया कि 27 फरवरी से एक मार्च तक अलवर शहर के नंगली सर्किल, अग्रसेन सर्किल, मिनी सचिवालय और होप सर्कस पर इनकी स्टाल लगाई जाएगी। नंगली सर्कल और अग्रसेन सर्किल पर लगी स्टालों पर सबसे ज्यादा बिक्री होती है। गुलाबी रंग की गुलाल पलाश के फूलों से बनती है जबकि हरे रंग के गुलाल के लिए नीम वगैरा अन्य पत्तियां इस्तेमाल में ली जाती हैं जो स्वास्थ्य और त्वचा के लिहाज से सुरक्षित होती हैं।
श्री मदनलाल ने बताया कि इनका कोई दुष्प्रभाव नहीं होता। इनमें किसी रसायन का इस्तेमाल भी नहीं किया जाता। यह पूरी तरह अरारोट और फूलों से बना हर्बल गुलाल है जो त्वचा के लिए सबसे ज्यादा सुरक्षित है।
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