श्रीनगर , जनवरी 07 -- जम्मू-कश्मीर पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस इकाई ने बुधवार को साइबर ठगी और आतंकवाद फंडिंग में इस्तेमाल हो रहे संदिग्ध बैंक खातों के नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू करते हुए घाटी भर में समन्वित छापेमारी के दौरान 22 लोगों को हिरासत में लिया।
अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि ये छापे कश्मीर संभाग के श्रीनगर, बडगाम, शोपियां और कुलगाम जिलों में मारे गए। पुलिस सूत्रों ने बताया कि प्रारंभिक जांच के दौरान कश्मीर संभाग में सक्रिय 22 संदिग्धों की पहचान की गयी। श्रीनगर की विशेष एनआईए अदालत से तलाशी वारंट प्राप्त करने के बाद काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर ने 22 स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। इसमें 17 श्रीनगर में, तीन बडगाम में तथा एक-एक शोपियां और कुलगाम में थे।
तलाशी के दौरान "महत्वपूर्ण आपत्तिजनक सामग्री" बरामद की गई, जिसमें डिजिटल उपकरण और वित्तीय रिकॉर्ड शामिल हैं जो जांच के लिए अहम है। पुलिस सूत्रों ने कहा, "अब तक 22 लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है ताकि साइबर ठगी, अवैध ऑनलाइन गेमिंग, सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन से जुड़े उनकी सटीक भूमिका और कड़ियों का पता लगाया जा सके।"विश्वसनीय और ठोस खुफिया सूचनाओं के आधार पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66 (सी) और 66 (डी), भारतीय न्याय संहिता 2023 की धाराएं 303, 308, 314, 316 (2), 318 (4), 336 (3), 340 (2) और 61 (2) तथा गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की धारा 13 के तहत प्राथमिकी पुलिस स्टेशन काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर में दर्ज की गयी। इससे एक संगठित और गहराई से जड़े वित्तीय अपराध सिंडिकेट का खुलासा हुआ है, जो राष्ट्रीय आर्थिक सुरक्षा और डिजिटल सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।
पुलिस के अनुसार, अब तक की जांच में एक सुनियोजित साजिश सामने आई है, जिसमें आरोपी स्थानीय और बाहरी तत्वों के साथ मिलीभगत कर निर्दोष, कमजोर और आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों के बैंक खातों का दुरुपयोग कर रहे थे और उन्हें 'म्यूल खाता' बना दिया गया था।
म्यूल खाता वह बैंक या डिजिटल भुगतान खाता होता है जिसका इस्तेमाल अपराधी अवैध रूप से हासिल किए गए धन को प्राप्त करने, स्थानांतरित करने और छिपाने के लिए करते हैं। ऐसे खाते का धारक या तो जानबूझकर इसमें शामिल होता है, या जानबूझकर अनजान बना रहता है, या फिर उसे बिल्कुल पता नहीं होता कि उसके खाते का दुरुपयोग हो रहा है।
इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी और ऑनलाइन घोटालों, प्रतिबंधित ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म, फर्जी निवेश और ट्रेडिंग ऐप्स से उत्पन्न अवैध धन की भारी रकम को अस्थायी रूप से इधर-उधर भेजने के लिए किया जा रहा था। पुलिस ने कहा, "चिंताजनक बात यह है कि इस अवैध रूप से अर्जित धन को आगे आतंकवादी फंडिंग और देश की संप्रभुता व अखंडता के खिलाफ गतिविधियों में इस्तेमाल किये जाने की आशंका है।"पुलिस के अनुसार, साइबर ठग खुद को बैंक अधिकारी, पुलिस, भर्ती एजेंट या निवेश सलाहकार बताकर कॉल, संदेश और ऑनलाइन विज्ञापनों के ज़रिये लोगों को फंसाते हैं और फर्जी शॉपिंग, ट्रेडिंग, गेमिंग एवं केवाईसी घोटालों में धकेलते हैं। इसके बाद पीड़ितों को पैसे ट्रांसफर करने या ओटीपी और पासवर्ड साझा करने के लिए बहकाया जाता है, जिससे खातों पर कब्ज़ा कर लिया जाता है।
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