देहरादून , नवम्बर 03 -- केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि हिमालय केवल पर्वत नहीं, बल्कि भारत की शक्ति, आध्यात्मिकता और पहचान के प्रतीक हैं। श्री रिजिजू सोमवार को उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जनपद अन्तर्गत, पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री डा रमेश पोखरियाल निशंक द्वारा बनाए गए "लेखक गांव" में स्पर्श हिमालय महोत्सव 2025 का उद्घाटन करने के बाद कार्यक्रम में उपस्थित देश, विदेश के लेखकों और साहित्यकारों को संबोधित कर रहे थे।

यह आयोजन अंतर्राष्ट्रीय साहित्य, संस्कृति एवं कला पर आधारित है। इस अवसर पर भगवान धनवंतरि की प्रतिमा का लोकार्पण भी किया गया।

उन्होंने हिमालयी राज्यों की अपनी यात्राओं का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सीमा क्षेत्रों जैसे उत्तराखंड के गुंजी में सड़क संपर्क एवं अवसंरचना के विस्तार के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत की सुंदरता इसकी विविधता में निहित है। हम भले अलग भाषाएँ बोलते हों और अलग परंपराएँ निभाते हों, परंतु हमारे मूल्य और दृष्टि हमें एक सूत्र में बांधते हैं। उन्होंने आगे कहा कि हमारा संविधान लोकतंत्र को दिया गया सबसे सुंदर योगदान है, जो हमारी एकता, करुणा और सामूहिक भावना का जीवंत प्रतीक है।

केंद्रीय मंत्री श्री रिजिजू ने 'लेखक ग्राम' को रचनात्मकता, ज्ञान और हिमालयी प्रेरणा का केंद्र बनाने के लिए डॉ. निशंक के उल्लेखनीय कार्य की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे स्वयं अरुणाचल प्रदेश से होने के कारण हिमालय से भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं।

कार्यक्रम में डॉ. निशंक ने कहा कि 'लेखक ग्राम' पहल का उद्देश्य गाँवों को रचनात्मकता, संस्कृति और शिक्षा के केंद्रों में विकसित करना है।

पतंजलि के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आचार्य बालकृष्ण ने भारत की प्राचीन ज्ञान परंपराओं, आयुर्वेद और हिमालयी पारिस्थितिकी के संरक्षण में पतंजलि के योगदान का उल्लेख किया। प्रो. अनिल सहस्रबुद्धे ने 'लेखक ग्राम' की अवधारणा की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) की उस भावना का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक शिक्षा से जोड़ती है।

इस अवसर पर प्रो. सोमवीर (इंडोनेशिया) ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लोकतांत्रिक और संसदीय संवाद को प्रोत्साहित करने में श्री रिजिजू की भूमिका की सराहना की तथा भारत के 'स्वच्छता अभियान' की भी प्रशंसा की। पद्मश्री डॉ. बी.के. संजय, निदेशक, एम्स गुवाहाटी ने हिमालयी परंपराओं के समग्र स्वास्थ्य संवर्धन में महत्व को रेखांकित किया। विख्यात संत स्वामी अवधेशानंद गिरि ने जनसमूह को आशीर्वाद देते हुए जीवन में अध्यात्म, सेवा एवं नैतिक अनुशासन के महत्व पर बल दिया।

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