धर्मशाला , नवंबर 04 -- हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा है कि राज्य विधानसभा का शीतकालीन सत्र दिसंबर की बजाय नवंबर के अंतिम सप्ताह में आहूत की जा सकती है।
श्री पठानिया सोमवार को यह जानकारी दी। वह रैत में चार दिवसीय फेडरेशन कप क्लासिक और इक्विप्ड पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप 2025 के दूसरे दिन मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभागियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस बदलाव पर विचार किया जा रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सत्र दिसंबर में पर्यटन के चरम मौसम के साथ न हो, जिससे पर्यटकों और स्थानीय व्यवसायों को असुविधा हो सकती है।
उन्होंने कहा कि यह सत्र पारंपरिक रूप से धर्मशाला के तपोवन में दिसंबर में आयोजित होता है। तपोवन में आगामी शीतकालीन सत्र में आठ बैठकें होने की उम्मीद है, जिससे यह अब तक का सबसे लंबा शीतकालीन सत्र होगा। उन्होंने हिमाचल प्रदेश विधान सभा की देश के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले विधायी संस्थानों में से एक के रूप में प्रशंसा की। उन्होंने ज़ोर दिया कि रचनात्मक बहस और संवाद लोकतांत्रिक संस्थाओं को मज़बूत बनाते हैं और सार्थक आर्थिक एवं सामाजिक प्रगति को संभव बनाते हैं।
उन्होंने हिमाचल की लोकतांत्रिक विरासत पर विचार करते हुए बताया कि पहला पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन 1925 में शिमला में आयोजित किया गया था, जो भारत की लोकतांत्रिक यात्रा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। उन्होंने यह भी बताया कि विट्ठलभाई पटेल हिमाचल प्रदेश से केंद्रीय विधान परिषद के अध्यक्ष चुने गए थे।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश विधानसभा देश की पहली कागज़ रहित विधानमंडल है। उन्होंने हिमाचल के लोगों की देशभक्ति और राष्ट्र के प्रति समर्पण की सराहना की और कहा कि विधायी कार्यप्रणाली में दक्षता और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।"श्री पठानिया ने आगे कहा कि युवा विधायकों को विचारों का योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि शासन और नीति निर्माण सभी नागरिकों, विशेष रूप से समाज के वंचित और हाशिए पर पड़े वर्गों के जीवन को बेहतर बनाने पर केंद्रित हो।
कार्यक्रम में उप मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया भी उपस्थित थे।
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