धर्मशाला , मार्च 14 -- हिमाचल प्रदेश में राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के दायरे से बाहर करने के राज्य सरकार के फैसले पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने इस कदम को लोकतंत्र के लिए "काला आदेश" करार देते हुए आरोप लगाया कि सरकार भ्रष्टाचार को बचाने की कोशिश कर रही है।

शुक्रवार को जारी एक प्रेस बयान में भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता संजय शर्मा ने कांग्रेस सरकार के इस फैसले को "लोकतंत्र का काला अध्याय" बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार भ्रष्ट अधिकारियों और नेताओं को संरक्षण देने के लिए इस तरह का निर्णय ले रही है।

श्री संजय शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 24(4) की गलत व्याख्या की है। उनके अनुसार यह धारा केवल खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों को आरटीआई के दायरे से छूट देती है, जबकि राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो एक जांच एजेंसी है जो भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करती है, इसलिए इसे आरटीआई से बाहर नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार सत्ता में "व्यवस्था परिवर्तन" के वादे के साथ आई थी, लेकिन अब वही सरकार भ्रष्टाचार की जांच करने वाली प्रमुख एजेंसी को जनता की जवाबदेही से दूर करने का प्रयास कर रही है।

भाजपा प्रवक्ता ने यह भी दावा किया कि विजिलेंस ब्यूरो को "सुरक्षा और खुफिया" श्रेणी में रखने से नागरिकों को भ्रष्टाचार की जांच की प्रगति, चार्जशीट दाखिल करने में देरी और बड़े घोटालों से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने में बाधा आएगी।

सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए श्री शर्मा ने कहा कि यह कदम इस बात का संकेत है कि मौजूदा सरकार अपने कार्यकाल में हुई कथित अनियमितताओं से जुड़े सवालों को दबाना चाहती है।

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