शिमला , जनवरी 03 -- मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की शिमला इकाई ने कांगड़ा जिले के धर्मशाला स्थित एक कॉलेज की 19 वर्षीय दलित छात्रा की मौत के मामले में निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर जिला उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने कथित पुलिस निष्क्रियता और सरकारी तंत्र की विफलता के खिलाफ नारेबाजी की। पार्टी नेताओं ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि युवती की मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है।
माकपा ने आरोप लगाया कि छात्रा के माता-पिता ने दो बार धर्मशाला पुलिस थाने में साथी छात्रों द्वारा रैगिंग और एक शिक्षक द्वारा शारीरिक उत्पीड़न की शिकायत की थी, लेकिन पुलिस ने युवती की खराब सेहत का हवाला देकर प्राथमिकी दर्ज करने से इनकार कर दिया और कहा कि उसके ठीक होने के बाद बयान दर्ज किए जाएंगे।
पार्टी नेताओं का दावा है कि 19 वर्षीय छात्रा करीब ढाई महीने तक गंभीर मानसिक तनाव में रही और उसकी मौत से पहले विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा था। छात्रा की 26 दिसंबर को मृत्यु हो गयी। माकपा ने पुलिस प्रशासन, कॉलेज प्रबंधन और सरकार को इस घटना के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि यदि समय पर कार्रवाई की गयी होती तो छात्रा की जान बचायी जा सकती थी।
पार्टी ने महिलाओं और छात्राओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा और यौन अपराधों पर भी चिंता जतायी। पार्टी ने कहा कि इन्हें रोकने में सरकार और पुलिस दोनों विफल रही हैं। माकपा ने मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, शैक्षणिक संस्थानों में लैंगिक उत्पीड़न विरोधी जागरूकता समितियों के गठन और शिकायत दर्ज करने से इनकार करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की।
प्रदर्शन में कुलदीप तंवर, जगमोहन ठाकुर सहित कई पार्टी कार्यकर्ता शामिल हुए। माकपा ने चेतावनी दी कि यदि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित नहीं की गयी तो पार्टी राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करेगी।
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