धर्मशाला , दिसंबर 22 -- हिमाचल प्रदेश में मत्स्य विभाग ने कांगड़ा जिले के पोंग बांध इलाके में अवैध तरीके से मछली की बिक्री के खिलाफ एक हफ्ते तक चलाए गये विशेष अभियान के दौरान 14 मामले दर्ज किए गए और 11,800 रुपये का जुर्माना वसूल किया है।

यहां जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार यह सघन अभियान सहायक निदेशक मत्स्य संदीप कुमार के नेतृत्व में चलाया गया। खटियाड़, स्थाना, धमेता, जवाली, बरनाली और नगरोटा सूरियां के मत्स्य अधिकारियों की एक विशेष टीम ने जवाली, घर-जरौट, नगरोटा सूरियां, फतेहपुर और आसपास के इलाकों में दुकानों और सड़क किनारे ढाबों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कई दुकानें बिना वैध बिल के मछली बेचती पाई गईं। अवैध रूप से बेची जा रही मछली मौके पर ही जब्त कर ली गई और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई।

विज्ञप्ति के अनुसार सिर्फ एक हफ्ते में अवैध रूप से बेची जा रही मछली के 14 मामले दर्ज किये गये और जुर्माना लगाया गया। हिमाचल प्रदेश के मत्स्य निदेशक विवेक चंदेल ने कहा कि विभाग मछली के अवैध पकड़ने-बिक्री के प्रति शून्य सहिष्णुता नीति अपनाता है। उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान, पोंग बांध मत्स्य सर्कल ने अब तक अवैध तरीके से मछली पकड़ने और बिक्री के 305 मामले पकड़ में आए हैं, जिससे कुल 2,92,350 रुपये का जुर्माना वसूला गया है।

श्री चंदेल ने कहा कि पोंग बांध मछुआरों के लिए आजीविका का एक महत्वपूर्ण स्रोत है और किसी भी परिस्थिति में अवैध गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी इस तरह के अचानक निरीक्षण अभियान जारी रहेंगे। विभाग ने जनता से भी अपील की है कि अगर उन्हें कोई अवैध मछली व्यापार दिखे तो तुरंत मत्स्य अधिकारियों को सूचित करें, ताकि समय पर और कड़ी कार्रवाई की जा सके।

उन्होंने कहा कि पोंग जलाशय मछुआरों के लिए रोज़ी-रोटी का एक ज़रूरी ज़रिया है और किसी भी हालत में गैर-कानूनी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी इस तरह के अचानक निरीक्षण अभियान जारी रहेंगे। विभाग ने जनता से अपील की है कि अगर उन्हें मछली का कोई भी गैर-कानूनी व्यापार दिखे, तो तुरंत मत्स्य अधिकारियों को सूचित करें, ताकि समय पर और कड़ी कार्रवाई की जा सके।

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