शिमला , अप्रैल 05 -- हिमाचल प्रदेश सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान निराश्रित और आवारा गोवंश के कल्याण के लिए 'गोपाल योजना' के तहत 14.68 करोड़ रुपये जारी किए हैं।
रविवार को एक आधिकारिक प्रवक्ता ने बताया कि यह राशि पंजीकृत गौशालाओं और गो अभयारण्यों को रखरखाव अनुदान के रूप में दी गई है, ताकि परित्यक्त गायों को उचित देखभाल, आश्रय और पोषण मिल सके।
प्रवक्ता ने कहा कि राज्य सरकार ने आवारा पशुओं की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं, जो किसानों के लिए एक बड़ी चिंता बन चुकी है। कई क्षेत्रों में ये पशु खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक हानि होती है।
उन्होंने बताया कि कुछ इलाकों में स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि किसानों ने खेती कम कर दी है या पूरी तरह छोड़ दी है।
गोवंश देखभाल ढांचे को मजबूत करने के लिए सरकार ने पंजीकृत आश्रयों में रखी गई गायों के रखरखाव के लिए वित्तीय सहायता बढ़ा दी है। 1 अक्टूबर 2025 से प्रति गाय मासिक अनुदान 700 रुपये से बढ़ाकर 1,200 रुपये कर दिया गया है।
यह बढ़ा हुआ अनुदान हिमाचल प्रदेश गौ सेवा आयोग के माध्यम से वितरित किया जा रहा है, ताकि आश्रयों के बेहतर प्रबंधन के साथ पशुओं के पोषण, स्वास्थ्य और समग्र कल्याण को सुनिश्चित किया जा सके।
प्रवक्ता ने कहा कि आवारा गोवंश का उचित पुनर्वास किसानों की समस्याओं को कम करेगा और उन्हें खेती जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करेगा।
यह पहल सड़क सुरक्षा में भी सुधार लाने में मददगार होगी, क्योंकि सड़कों पर आवारा पशुओं के कारण कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं।
सरकार ने 2026-27 के बजट में भी इस दिशा में कई प्रस्ताव रखे हैं, ताकि आवारा पशुओं के पुनर्वास को और मजबूत किया जा सके। पिछले कुछ वर्षों में राज्य में कई गौ अभयारण्य और बड़े 'गौसदन' स्थापित किए गए हैं।
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