शिमला , मई 11 -- हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार को बताया कि 'चिट्टा' के खतरे के खिलाफ हिमाचल प्रदेश सरकार की तेज की गई कार्रवाई के तहत, नशीले पदार्थों से जुड़ी गतिविधियों में संलिप्तता के लिए 21 पुलिस कर्मियों सहित 31 सरकारी कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।

यहां नारकोटिक्स समन्वय (एनसीओआरडी) समिति की बैठक की अध्यक्षता करने के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नशा संबंधी गतिविधियों में संलिप्त पाये गये 123 सरकारी कर्मचारियों और पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की गयी है। इनमें 21 पुलिस कर्मियों और 10 राज्य सरकार के कर्मचारियों की बर्खास्तगी शामिल है। इसके अलावा, हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी), खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति तथा ग्रामीण विकास विभाग के दो-दो कर्मचारियों के साथ-साथ राज्य बिजली बोर्ड (एचपीएसईबीएल), बैंकिंग संस्थानों, जल शक्ति और पशुपालन विभागों के एक-एक कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी शुरू की गयी है।

श्री सुक्खू ने कहा कि सरकार ने नशा तस्करी के खिलाफ शून्य सहनशीलता की नीति अपनायी है और किसी भी व्यक्ति को, चाहे वह किसी भी पद पर हो, बख्शा नहीं जायेगा। उन्होंने कहा, "हमारी सरकार और पुलिसिंग व्यवस्था के लिए ईमानदारी, अनुशासन और जनता का विश्वास सर्वोपरि है। पुनर्वास-केंद्रित दृष्टिकोण के माध्यम से, हम नशा छोड़ने के इच्छुक युवाओं को उपचार, परामर्श और पुनर्वास सुविधाओं से भी जोड़ रहे हैं।" उन्होंने बताया कि शिमला जिले के मशोबरा में एक पुनर्वास केंद्र स्थापित किया जा रहा है, जो इस साल 20 मई से कार्यात्मक हो जायेगा, जबकि डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय मेडिकल कॉलेज, टांडा में एक अन्य केंद्र जल्द ही शुरू किया जायेगा।"मुख्यमंत्री ने सूचित किया कि 2023 से अब तक एनडीपीएस अधिनियम के तहत 6,811 मामले दर्ज किये गये हैं, जो पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल की तुलना में 33.18 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाते हैं। इसी अवधि के दौरान पूरे राज्य में 10,357 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और चिट्टे सहित 45,867 किलोग्राम नशीले पदार्थ जब्त किये गये। उन्होंने बताया कि पीआईटी-एनडीपीएस अधिनियम के तहत 174 नशा तस्करों और माफिया गुर्गों को हिरासत में लिया गया है। इस अधिनियम के तहत नशा माफियाओं के खिलाफ निवारक कार्रवाई करने में हिमाचल प्रदेश वर्तमान में देश में पहले स्थान पर है।

श्री सुक्खू ने दावा किया कि केवल 2026 में ही, देशभर में एनडीपीएस अधिनियम के तहत की गयी कुल निवारक कार्रवाइयों में से लगभग एक-तिहाई अकेले हिमाचल प्रदेश पुलिस ने की है। उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में नशा व्यापार से जुड़ी लगभग 51 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति जब्त की गयी है, जो पिछली सरकार के कार्यकाल की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक है।

उन्होंने कहा कि स्पेशल टास्क फोर्स ने 700 से अधिक मामलों की जांच की है और वित्तीय जांच तथा संपत्ति फ्रीज करने के लिए 300 मामलों का चयन किया है। अब तक 76 अवैध संपत्तियों की पहचान की जा चुकी है और 17 मामलों में ध्वस्तीकरण या बेदखली की कार्रवाई शुरू कर दी गयी है। उन्होंने अधिकारियों को नशा तस्करों की अवैध रूप से अतिक्रमित संपत्तियों को ढहाने के निर्देश दिये और जिला प्रशासन को बार-बार अपराध करने वाले अपराधियों की मैपिंग करने का निर्देश दिया।

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