शिमला , फरवरी 12 -- हिमाचल प्रदेश के करीब 6100 सरकारी स्कूलों में गुरुवार को करीब 50 दिन के शीतकालीन अवकाश के बाद नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो गया।
छात्र अगली क्लास में पदोन्नत होने के बाद नए जोश के साथ स्कूल परिसर में लौटे, जिससे एक नए शैक्षणिक साल की शुरुआत हुई। सुबह की प्रार्थना, किताबें बांटने और कक्षा कक्ष में बातचीत से सत्र का माहौल बना, जबकि शिक्षकों ने छात्रों का स्वागत किया और उन्हें उनके नए पाठयक्रम के बारे में बताया।
शिक्षकों ने बताया कि सभी ज़रूरी तैयारियां पहले ही पूरी कर ली गई थीं। स्कूलों को यह सुनिश्चत करने के लिए कहा गया है कि शिक्षक और छात्रों की उपस्थिति पहले दिन से ही वीएसके पोर्टल पर मार्क हो जाए। सरकारी स्कूलों में दाखिला प्रक्रिया भी साथ ही शुरू हो गयी है। शिक्षा विभाग का मकसद इस साल छात्रों का नामांकन बढ़ाना है।
अधिकारियों ने कहा कि सरकारी स्कूलों को मजबूत करने के लिए पिछले सत्र में शुरू की गई एक नई पहल को अब और तेज़ किया जा रहा है। निजी स्कूलों की तरह संस्थानों की ब्रांडिंग की जा रही है, जिसमें हेडमास्टर और शिक्षक सोशल मीडिया अभियान, पैम्फलेट, स्लोगन, रैली और घर-घर जाकर जागरुकता अभियान के ज़रिए अभिभावकों तक पहुंच रहे हैं।
सोलन के उप जिला शिक्षा अधिकारी (प्राइमरी) राजकुमार पराशर ने कहा कि अभिभावकों को प्रोत्साहित करने के लिए हर स्कूल में विशेष नामांकन अभियान चलाए जा रहे हैं।
स्कूल प्रमुख से कहा गया है कि वे मिड-डे योजना , पोषण कार्यक्रम , निशुल्क यूनिफॉर्म और पाठ्यपुस्तकें, बेहतर फर्नीचर, मॉडर्न साइंस और आईटी लैब और स्मार्ट क्लासरूम जैसी उपलब्धियां और सुविधाओं का उल्लेख जरूर करें।
प्रारंभिक शिक्षा उप निदेशक मोहिंदर चंद पिरटा ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सरकारी स्कूल गुणवत्ता शिक्षा देने के लिए प्रतिबद्व हैं और उन्होंने अभिभावकों से सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली पर भरोसा करने की अपील की।
इस बीच, हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड (एचपीएसईबी) के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने नई दिल्ली में हिमाचल सदन में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू से प्रशासनिक सुधारों और डिजिटल पहलों के बारे में जानकारी देने के लिए मुलाकात की।
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