नयी दिल्ली , दिसंबर 03 -- प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हिमाचल प्रदेश में धन शोधन के मामले में 2.58 करोड़ रुपये मूल्य की दो अचल संपत्तियाँ कुर्क की हैं।

ईडी के शिमला उप-क्षेत्रीय कार्यालय ने बुधवार को यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि यह मामला हिमाचल प्रदेश के सहायक औषधि नियंत्रक निशांत सरीन और उनकी सहयोगी कोमल खन्ना के खिलाफ रिश्वत, भ्रष्टाचार, जालसाजी और आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोपों से जुड़ा है। कुर्क की गई संपत्तियों में हरियाणा के पंचकूला के सेक्टर-20 में एक आवासीय फ्लैट और हिमाचल प्रदेश के शिमला में एक आवासीय भवन शामिल है।

ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत हिमाचल प्रदेश पुलिस के राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसवी एंड एसीबी) की ओर से दर्ज प्राथमिकी के आधार पर अपनी जांच शुरू की थी। यह प्राथमिकी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत निशांत सरीन के खिलाफ दर्ज की गई थी, जो उस समय हिमाचल प्रदेश के बद्दी में सहायक औषधि नियंत्रक थे। इसके बाद सरीन को एसवी एंड एसीबी ने गिरफ्तार कर लिया था और उनके तथा कोमल खन्ना के खिलाफ 2021 में एक आरोपपत्र दाखिल किया गया था।

उन्होंने बताया कि हरियाणा पुलिस ने भी 2022 में इन दोनों आरोपियों और अन्य के खिलाफ एक 'पार्टनरशिप डीड' में कथित जालसाजी, धमकी और जबरन वसूली से संबंधित अलग प्राथमिकी दर्ज की थी। कथित तौर पर 'पार्टनशिप डीड' में जालसाजी की गयी थी, ताकि कोमल खन्ना की हिस्सेदारी को 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 95 प्रतिशत करने के लिए की गयी थी। इसके बाद हिमाचल प्रदेश की एसवी एंड एसीबी द्वारा सरीन के खिलाफ एक और प्राथमिकी 23 सितंबर, 2025 में दर्ज की गई थी, जिसमें उन पर राज्य में औषधि निरीक्षक और सहायक औषधि नियंत्रक के रूप में कार्य करते हुए लगभग 1.66 करोड़ रूपये की आय से अधिक संपत्ति जमा करने का आरोप लगाया गया था।

ईडी की जाँच से पता चला कि सरीन ने नाहन, बद्दी और सोलन सहित विभिन्न स्थानों पर तैनात रहते हुए, दवा निर्माताओं और वितरकों से रिश्वत प्राप्त करने के लिए अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया। इसके अलावा, यह पाया गया कि सरीन की धमकी और दबाव के तहत कई दवा कंपनियों को कोमल खन्ना द्वारा नियंत्रित जेनिया फार्मास्यूटिकल्स और निया फार्मा के साथ भारी नुकसान पर व्यापार करने के लिए मजबूर किया गया था। अपराध से कमाई गयी इस आय को फिर बैंक में जमा किया गया और इससे आरोपियों के परिवार के सदस्यों के नाम अचल संपत्तियां खरीदी गईं तथा इसे व्यक्तिगत संपत्तियों के रूप में हस्तांतरित की गईं।

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