शिमला , मार्च 06 -- हिमाचल प्रदेश परिवहन विभाग ने स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और परिचालन लागत कम करने के लिए शिमला स्थित अपने निदेशालय में सौर ऊर्जा संचालित इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग प्रणाली शुरू की है।

परिवहन विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि यह पहल 31 मार्च तक हिमाचल प्रदेश को हरित ऊर्जा राज्य में बदलने के राज्य सरकार के व्यापक लक्ष्य का हिस्सा है। इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत शिमला स्थित परिवहन निदेशालय में 15 किलोवाट का सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया गया है। सौर पैनलों से उत्पन्न बिजली का उपयोग विभागीय इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करने में किया जायेगा। इससे विभाग को चार्ज करने के लिए बिजली बिलों के भुगतान की आवश्यकता समाप्त हो जायेगी।

अधिकारियों ने कहा कि यह प्रणाली सीधे चार्जिंग यूनिट को बिजली की आपूर्ति करती है, जबकि अतिरिक्त बिजली को 70 किलोवाट के इन्वर्टर के जरिये बैटरी में संग्रहित किया जाता है, ताकि सौर ऊर्जा उपलब्ध न होने पर इसका उपयोग किया जा सके। विभागीय वाहनों के लिए इस्तेमाल किये जाने वाले इस चार्जिंग स्टेशन को लोगों के लिए भी खोला गया है। इलेक्ट्रिक वाहन मालिक अब 16 रुपये प्रति यूनिट की दर से इस सुविधा पर अपने वाहन चार्ज कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि यह पहल पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने में मदद करेगी।

परिवहन विभाग वर्तमान में 18 इलेक्ट्रिक वाहनों का संचालन कर रहा है। इन वाहनों ने बेड़े में पुराने पेट्रोल और डीजल गाड़ियों की जगह ली है। निदेशालय सहित सभी क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (आरटीओ) ने आधिकारिक उपयोग के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को शामिल किया है। इस बदलाव से परिचालन लागत को काफी कम कर दिया है और विभाग शून्य ड्राइविंग खर्च के करीब आ गया है।

हिमाचल प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या में निरंतर वृद्धि देखी जा रही है और वर्तमान में राज्य में 5,300 से अधिक ईवी (ईवी) पंजीकृत हैं। चार्जिंग बुनियादी ढांचे का भी विस्तार हो रहा है, जिसमें छह निर्धारित ग्रीन कॉरिडोर के साथ कई बिंदुओं के अलावा 30 पेट्रोल पंपों और 52 होटलों में स्टेशन स्थापित किये गये हैं।

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