शिमला , जनवरी 04 -- हिमाचल प्रदेश में होने वाले आगामी पंचायत चुनाव अप्रत्याशित रूप से चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं क्योंकि जहां एक ओर चुनाव कार्यक्रम को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है वहीं दूसरी ओर एक नयी प्रशासनिक एडवाइजरी ने संभावित उम्मीदवारों को संकट में डाल दिया है।

एक ओर राजनीतिक दल एवं उम्मीदवार इन चुनावों की तैयारियों में जुटे हुए हैं, वहीं राज्य सरकार प्रशासनिक एवं कानूनी बाधाओं का हवाला देते हुए कम से कम अगले छह महीनों तक पंचायत चुनाव नहीं कराने के अपने पूर्व रुख पर कायम है।

इन अनिश्चितताओं को और बढ़ाते हुए पंचायत राज विभाग ने एक नयी एडवाइजरी जारी की है जिसमें संभावित उम्मीदवारों को चेतावनी दी गई है कि अगर वे सरकारी या सार्वजनिक भूमि का अतिक्रमण करने में शामिल हैं तो वे चुनाव न लड़ें। यह एडवाइजरी राज्य चुनाव आयोग के हालिया निर्देशों के बाद जारी की गयी है।

शिमला के सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) द्वारा जारी एक आधिकारिक सूचना के अनुसार सभी रिटर्निंग अधिकारियों एवं सहायक रिटर्निंग अधिकारियों को अतिक्रमण के आधार पर अयोग्यता संबंधित कानूनी प्रावधानों का सख्ती से लागू करने के लिए कहा गया है। अधिसूचना में हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 122(1)(सी) का उल्लेख किया गया है, जो सरकारी भूमि पर अतिक्रमण करने वालों को पंचायत चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य ठहराता है।

इस सलाह में पांच मई, 2025 को उच्च न्यायालय के एक फैसले का भी हवाला दिया गया है जिसमें न्यायालय ने स्पष्ट कहा था कि अतिक्रमण वाली भूमि को नियमित करने के लिए आवेदन करने वाला व्यक्ति भी पंचायती राज संस्थाओं में चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हो जाएगा। नामांकन एवं जांच प्रक्रिया के दौरान एक समान निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए अब सभी चुनाव अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं।

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