शिमला , नवंबर 11 -- हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने स्थापित नियमों का उल्लंघन कर सरकारी आवास आवंटित करने के मामले में सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) के सचिव पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया है।
अदालत ने सामान्य पूल से किए गए विवादास्पद आवंटन को भी रद्द कर दिया और जुर्माने की राशि मुख्य न्यायाधीश के आपदा राहत कोष में जमा करने का निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति ज्योत्सना रेवाल दुआ की पीठ ने पाया कि राज्य सरकार के अधिकारियों ने आवास आवंटन करते समय कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। अदालत ने कहा कि अधिकारियों ने कानूनी प्रक्रियाओं की अनदेखी की और अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम किया।
अदालत ने विशेष रूप से 5 जनवरी, 2024 और 16 मार्च, 2024 के दो आवास आवंटन पत्रों को रद्द कर दिया है जिनके तहत एक सरकारी ड्राइवर को बिना बारी के आवास आवंटित किया गया था जबकि अन्य पात्र कर्मचारियों के पुराने आवेदन अभी भी लंबित थे।
उच्च न्यायालय ने इस प्रक्रिया को मनमाना और अपारदर्शी मानते हुए अधिकारियों को याचिकाकर्ता और प्रतिवादी चालक, दोनों के आवेदनों पर चार सप्ताह के भीतर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया।
इस कदम को "अनुचित, घोर अनियमित और अवैध" बताते हुए, उच्च न्यायालय ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई सरकारी आवास के आवंटन में प्रशासनिक निष्पक्षता और पारदर्शिता को कमजोर करती है।
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