शिमला , जनवरी 09 -- हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को निर्देश दिया कि राज्य में पंचायत चुनाव की प्रक्रिया 30 अप्रैल तक पूरी कर ली जाये।

न्यायमूर्ति विवेक ठाकुर और न्यायमूर्ति रमेश वर्मा की खंडपीठ ने पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव समय पर कराने की मांग करने वाली एक जनहितयाचिका पर यह फैसला सुनाया। पीठ ने आदेश दिया कि राज्य चुनाव आयोग और राज्य सरकार आपसी समन्वय से 28 फरवरी तक मतदाता सूची और आरक्षण रोस्टर को अंतिम रूप दें। चुनाव प्रक्रिया 20 फरवरी से शुरू होगी और इसे 30 अप्रैल तक संपन्न करना होगा।

उच्च न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि पंचायती राज संस्थायें संवैधानिक निकाय हैं और चुनावों को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करना स्वीकार्य नहीं है। न्यायालय ने मार्च में होने वाली स्कूली परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट किया कि अप्रैल में चुनाव कराना अधिक उपयुक्त और प्रशासनिक रूप से संभव होगा।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने नयी पंचायतों के पुनर्गठन, आरक्षण रोस्टर को अंतिम रूप देने और आपदा की स्थिति जैसे कारणों का हवाला देते हुए तत्काल चुनाव का विरोध किया था। सरकार ने तर्क दिया कि चुनाव प्रक्रिया पूरी करने के लिए कम से कम 90 दिनों की अवधि आवश्यक होगी। राज्य चुनाव आयोग ने भी परीक्षाओं में कर्मचारियों की तैनाती, मई में प्रस्तावित जनगणना और मानसून की बारिश जैसी व्यावहारिक कठिनाइयों का उल्लेख किया। अदालत इन दलीलों से हालांकि सहमत नहीं हुई।

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि सरकार के पास परिसीमन और अन्य तैयारी के लिए पर्याप्त समय था और वह आपदा प्रबंधन के बहाने जानबूझकर चुनाव में देरी कर रही है। याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि वर्तमान चुनाव मौजूदा परिसीमन और जनगणना के आंकड़ों के आधार पर कराये जायें और किसी भी नयी व्यवस्था को भविष्य के लिए लागू किया जाये।

यह जनहित याचिका एक अधिवक्ता ने दायर की थी और इसमें कहा गया था कि राज्य सरकार के बार-बार स्थगन के कारण असंवैधानिक देरी हुई है। राज्य की 3,577 पंचायतों के निर्वाचित प्रतिनिधियों का पांच साल का कार्यकाल 20 जनवरी को समाप्त होने वाला है और इस बीच प्रशासक इन निकायों का प्रबंधन करेंगे।

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