शिमला , जनवरी 02 -- हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक न्यायालयकर्मी की सेवा समाप्ति के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधवालिया और न्यायमूर्ति जिया लाल भारद्वाज की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि उच्च न्यायालय में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी फकीर चंद की सेवा समाप्ति सेवा नियमों और नियुक्ति की शर्तों के अनुसार ही की गयी थी।
पीठ ने कहा कि नियोक्ता को परिवीक्षा के दौरान कर्मचारी के काम और आचरण के आकलन का अधिकार होता है। यदि नियोक्ता संतुष्ट नहीं है तो परिवीक्षक की सेवा समाप्त की जा सकती है। न्यायालय याचिकाकर्ता के प्रदर्शन से असंतुष्ट था तो उसे सेवा से मुक्त करना उचित है।
फकीर चंद को जून 2019 में अनुच्छेद 229 के तहत के तहत उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश की पसंद के आधार पर चतुर्थवर्गीय कर्मचारी नियुक्त किया गया था। जनवरी 2023 में इस शर्त के साथ उनकी सेवा नियमित कर दी गयी थी कि इस अवधि के दौरान अगर उनका काम और व्यवहार संतोषजनक नहीं पाया गया तो सेवाएं समाप्त की जा सकती हैं। परिवीक्षा की अवधि पूरी होने से पहले उच्च न्यायालय ने इस आधार पर उन्हें सेवामुक्त कर दिया कि इस दौरान उनका प्रदर्शन संतोषजनक नहीं था।
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 381 के तहत आपराधिक कार्यवाही शुरू की गयी थी और उन्हें निलंबित कर दिया गया था। इस दावे के साथ कि सेवा समाप्ति का आदेश दंडात्मक प्रकृति के कारण है।
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