धर्मशाला , दिसंबर 15 -- हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने देश में बढ़ती जनसंख्या, प्रदूषण, गरीबी एवं बेरोजगारी पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की राजधानी दिल्ली एक विषाक्त गैस चैंबर में तब्दील हो चुकी है।

श्री कुमार ने सोमवार को एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि न केवल दिल्ली बल्कि भारत के कई शहर तेजी से गैस चैंबर बनते जा रहे हैं जहां जहरीली हवा बच्चों में कैंसर सहित गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन रही है। रिपोर्टों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण के कारण 2022 में भारत में लगभग 17 लाख लोगों की मौत हुई।

उन्होंने कहा कि भारत विश्व के सबसे धनी देशों में से एक होने के बावजूद, सबसे ज्यादा गरीब एवं भूखे लोगों का भी घर है। उन्होंने इस विरोधाभास का कारण अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि और बढ़ती आर्थिक असमानता को बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निरंतर प्रयासों के बावजूद, गरीबी और बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है। वैश्विक भूख सूचकांक का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि देश में लगभग 19 करोड़ लोग हर रात भूखे पेट सोते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि बढ़ती बेरोजगारी के कारण अपराध और आत्महत्याओं में वृद्धि हुई है, पिछले वर्ष लगभग 13,000 छात्रों सहित लगभग 1.87 लाख लोगों ने आत्महत्या की। जनसंख्या संबंधी दबावों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि दिल्ली की जनसंख्या 1947 में सात लाख से बढ़कर आज 3.46 करोड़ से अधिक हो गई है जबकि भारत की जनसंख्या स्वतंत्रता के समय 35 करोड़ से बढ़कर लगभग 143 करोड़ हो गई है, जो प्रति वर्ष लगभग दो करोड़ की वृद्धि दर्शाती है।

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