शिमला , मार्च 13 -- हिमाचल प्रदेश में व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं और इसकी कमी का असर राज्य भर के होटलों, रेस्तरां, ढाबों तथा होमस्टे इकाइयों पर पड़ने लगा है, जिससे पर्यटन उद्योग की चिंताएं बढ़ गयी है।

व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की सीमित उपलब्धता के मद्देनजर हॉस्पिटालिटी संस्थानों को खान-पान के लिए केरोसिन आधारित ईंधन के विकल्पों पर विचार करने की सलाह दी गयी है।

इस घटनाक्रम ने पर्यटन से जुड़े हितधारकों के बीच अनिश्चितता पैदा कर दी है, खासकर शिमला, मनाली, धर्मशाला और डलहौजी जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों में, जहां हॉस्पिटालिटी सेवाएं पूरी तरह एलपीजी आधारित कुकिंग पर निर्भर हैं।

माना जा रहा है कि इस स्थिति का सबसे बुरा असर होमस्टे संचालकों पर पड़ेगा, क्योंकि उन्हें व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए घरेलू एलपीजी सिलेंडरों का उपयोग करने की अनुमति नहीं है।

आधिकारिक पर्यटन आंकड़ों के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में लगभग 4,938 पंजीकृत होटल हैं, जिनकी बेड क्षमता करीब 1.38 लाख है। इसके अलावा, लगभग 4,905 पंजीकृत होमस्टे इकाइयां हैं, जो करीब 30,881 बेड की सुविधा देती हैं। इनके अलावा कई बेड-एंड-ब्रेकफास्ट संस्थान, रेस्तरां और सड़क किनारे बने ढाबे पहाड़ी राज्य में आने वाले पर्यटकों की सेवा करते हैं।

शिमला होटल एंड टूरिज्म स्टेकहोल्डर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहिंदर सेठ ने कहा कि किल्लत ने होटल संचालन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया, "होटल अपनी रसोई संभालने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, क्योंकि कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध नहीं हैं। रसोई गैस की कमी के कारण कुछ होटलों ने पहले ही शादी समारोहों और बड़े कार्यक्रमों को रद्द करना शुरू कर दिया है।"श्री सेठ ने कहा कि कई संस्थान अब उपलब्ध ईंधन को बचाने के लिए सीमित मेनू के साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने अपनी बात जोड़ते हुए कहा, "हमने अधिकारियों से कम से कम राशन (सीमित मात्रा) के आधार पर सिलेंडरों की आपूर्ति सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है, ताकि होटल पर्यटकों और कर्मचारियों को बुनियादी भोजन सेवाएं प्रदान करना जारी रख सकें।"उन्होंने यह भी कहा कि पर्यटन क्षेत्र को पिछले कुछ वर्षों में कई झटकों का सामना करना पड़ा है और रातों-रात अन्य वैकल्पिक ईंधन पर स्विच करना आसान नहीं है। संकट शुरू होने के बाद शिमला, कुल्लू और मंडी के दूरदराज के इलाकों में स्थित कई होमस्टे और बीएनबी भारी किल्लत का सामना कर रहे हैं।

हॉलिडे मार्ट के अशोक शर्मा ने कहा कि छोटे भोजनालय और चाय की दुकानें, जहां पर्यटक अक्सर जाते हैं, उन्हें भी अब इस किल्लत की तपिश महसूस होने लगी है।

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि जहां घरेलू एलपीजी की आपूर्ति सामान्य बनी हुई है, वहीं व्यावसायिक उपभोक्ताओं को कुछ किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के डिवीजनल एलपीजी सेल्स हेड मोहम्मद आमद खान ने कहा कि राज्य में घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की कोई कमी नहीं है और उनकी आपूर्ति निर्बाध रूप से जारी है। उन्होंने बताया, "हिमाचल प्रदेश में लगभग 55,000 कमर्शियल एलपीजी कनेक्शन हैं और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को कुछ कमी का अनुभव हो रहा है। हालांकि, बद्दी, ऊना और जालंधर में स्थित बॉटलिंग प्लांट से घरेलू सिलेंडरों की आपूर्ति सामान्य रूप से जारी है।"श्री खान ने कहा कि 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति वर्तमान में प्राथमिकता के आधार पर सरकारी और निजी अस्पतालों के साथ-साथ शैक्षणिक संस्थानों को की जा रही है, जबकि उद्योगों और बड़े प्रतिष्ठानों के उपयोग में आने वाले 47-किग्रा और 425-किग्रा के सिलेंडरों की आपूर्ति प्रभावित हुई है।

इस बीच, मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने कहा कि राज्य में वर्तमान में पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक है और जनता को घबराने की ज़रूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य में वर्तमान में लगभग 15,000 कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध हैं और मांग के अनुसार उन्हें होटलों, रेस्तरां और अन्य प्रतिष्ठानों को वितरित किया जा रहा है।

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