धर्मशाला , फरवरी 10 -- हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने राज्य के कथित वर्तमान आर्थिक संकट पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे गलत नीतियों, अत्यधिक फिजूलखर्ची और वित्तीय अनुशासन की कमी का परिणाम बताया है।
उन्होंने कहा कि एक छोटे राज्य होने के बावजूद, हिमाचल कभी अपनी ईमानदारी और मितव्ययिता के लिए जाना जाता था, लेकिन आज की राजनीति निहित स्वार्थों से प्रेरित हो गई है।
श्री कुमार ने मंगलवार को यहाँ जारी एक बयान में कहा कि राज्य की वित्तीय बदहाली अचानक नहीं आई है, बल्कि यह वर्षों की दोषपूर्ण योजना और अंधाधुंध खर्च का नतीजा है। उन्होंने कड़े शब्दों में उदाहरण देते हुए कहा कि भीषण आर्थिक संकट के दौर में 300 सदस्यों वाले एक 'अनावश्यक बोर्ड' का गठन करना "गंभीर राजनीतिक मूर्खता" है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में इस तरह के निकायों का निर्माण सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है।
अपने कार्यकाल को याद करते हुए वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए उस समय भी सादगी और मितव्ययिता पर जोर दिया था, जब राज्य ऐसे गंभीर संकट में नहीं था। उन्होंने बताया कि खर्चों में कटौती की शुरुआत उन्होंने अपने कार्यालय से की थी, जिसमें अनावश्यक फोन कनेक्शन हटाना, कैलेंडरों की छपाई कम करना और सरकारी वाहनों के दुरुपयोग पर सख्ती शामिल थी। उन्होंने दावा किया कि इन छोटे कदमों से सरकारी खजाने में बड़ी बचत हुई थी।
श्री कुमार ने प्रशासनिक सुधारों का जिक्र करते हुए कहा कि उनके समय में कैबिनेट का आकार छोटा रखा गया और पत्राचार की लागत तक को नियंत्रित किया गया। उन्होंने राजस्व बढ़ाने के प्रयासों पर जोर देते हुए कहा कि उनकी सरकार ने ही पहली बार केंद्र से जलविद्युत परियोजनाओं पर रॉयल्टी हासिल की थी और निजी क्षेत्र के लिए जलविद्युत के दरवाजे खोले थे, जिससे राज्य को स्थायी आय होने लगी।
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