शिमला , जनवरी 07 -- हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने बुधवार को राज्य में पंचायत चुनाव समय पर कराने की मांग संबंधी याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
न्यायमूर्ति विवेक ठाकुर और न्यायमूर्ति रमेश वर्मा की पीठ ने मामले की सुनवाई की। पीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रखने से पहले राज्य सरकार, राज्य चुनाव आयोग, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और याचिकाकर्ता की दलीलें सुनीं।
राज्य चुनाव आयोग और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से पेश होते हुए अधिवक्ता जनरल अनूप रतन ने तर्क दिया कि पंचायत चुनाव कराने में कोई अनावश्यक जल्दबाजी नहीं है क्योंकि आपदा प्रबंधन अधिनियम राज्य में अभी भी लागू है। उन्होंने कहा कि आपदा से संबंधित मौजूदा हालात व्यापक जनहित में चुनावी प्रक्रिया को स्थगित करने को उचित ठहराते हैं।
याचिकाकर्ता के वकील अधिवक्ता अंशुल दास ने कहा कि सरकार संवैधानिक रूप से पंचायती राज संस्थाओं का समय पर चुनाव सुनिश्चित करने के लिए बाध्य है। उन्होंने कहा कि पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों का कार्यकाल 20 जनवरी को समाप्त होने वाला है और निर्धारित अवधि के बाद किसी प्रकार की देरी संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन मानी जाएगी।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि राज्य आपदा प्रबंधन अधिनियम की आड़ में चुनावों को छह महीने के लिए स्थगित करने की कोशिश की जा रही है।
राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील शरवान डोगरा ने तर्क दिया कि आपदा प्रबंधन अधिनियम हटाए जाने के बाद, राज्य चुनाव आयोग को चुनावी प्रक्रिया पूरी करने के लिए कम से कम 160 दिनों का समय दिया जाना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि सरकार के पास अभी भी पर्याप्त समय है क्योंकि वर्तमान पंचायतों का कार्यकाल औपचारिक रूप से समाप्त नहीं हुआ है।
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