शिमला , दिसंबर 11 -- हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल वसूली को चुनौती देने वाली एक याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।

मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने गुरुवार को एक याचिका पर सुनवाई के दौरान सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए कहा। इस मामले में अगली सुनवाई सात मार्च को होगी।

इस याचिका को उत्तांश मोंगा नामक व्यक्ति ने दायर किया है जिसमें यह तर्क दिया गया है कि राष्ट्रीय राजमार्ग पूर्ण रूप से केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में है जिसके बावजूद, राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश टोल अधिनियम, 1975 के अंतर्गत टोल वसूल रही है। याचिका में कहा गया है कि टोल लगाने से यात्रियों, ट्रांसपोर्टरों और अन्य सेवा उपयोगकर्ताओं को प्रतिदिन नुकसान हो रहा है।

मोंगा ने तर्क दिया है कि राज्य सरकार के पास राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल वसूलने की वैधानिक अधिकार नहीं है और यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 246 और 254 का उल्लंघन करती है, जो संघ और राज्यों के बीच विधायी शक्तियों को निर्धारित करते हैं।

याचिका में परवानू, गरमोरा, तुनुहट्टी, काला अंब, कंदवाल, बद्दी और मेहटपुर बैरियरों पर टोल वसूली बंद करने की मांग की गई है। इसमें भाखरा ब्यास प्रबंधन बोर्ड द्वारा पोषित भाखरा-नांगल सड़क पर ग्वालाथाई बैरियर पर टोल वसूली को भी चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का दावा है कि यह भी राज्य के कानूनी अधिकार क्षेत्र से बाहर है।

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