शिमला , जनवरी 10 -- हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने दलाघाट की बाघल लैंड लूजर्स ट्रांसपोर्ट कोऑपरेटिव सोसाइटी के सदस्यों के सत्यापन का कार्य पूरा करने और एक निश्चित समय सीमा के भीतर चुनाव सुनिश्चित करने के लिए रजिस्ट्रार और सहायक रजिस्ट्रार को निर्देश दिया है।
इस आदेश के साथ ही पिछले एक दशक से अधिक समय से सोसाइटी के कामकाज में बाधा डालने वाले विवाद के समाप्त होने की उम्मीद है।
न्यायमूर्ति संदीप शर्मा की एकल पीठ ने नौ जनवरी को फैसला सुनाते हुए सोसाइटी के चुनावी क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण के रजिस्ट्रार के वर्ष 2018 के आदेश को बरकरार रखा। इसके साथ ही अदालत ने सदस्यों के नामांकन और मतदाता सूची से जुड़े विवादों को सुलझाने के लिए विस्तृत निर्देश जारी किये। अदालत के निर्देशानुसार सहकारी समिति के सहायक रजिस्ट्रार सोसाइटी की जनरल हाउस की बैठक बुलाएंगे और उन सदस्यों की आपत्तियों को स्वीकार करेंगे, जिन्हें नियमित सदस्य के रूप में शामिल होने की अनुमति नहीं है। जनरल हाउस के बाद सहायक रजिस्ट्रार सुनवाई करेंगे और पीठासीन सदस्य के रूप में अपना निर्णय देंगे, जो सभी उपस्थित सदस्यों को मान्य होगा।
उल्लेखनीय है कि दलाघाट और बाघल में एक निजी कंपनी अंबुजा सीमेंट के संयंत्र के लिए सीमेंट और चूने जैसी चीजों के परिवहन कार्य में लगी यह सोसाइटी वर्ष 2014 से मुकदमेबाजी में फंसी हुई है। उस समय प्रबंध समिति का कार्यकाल समाप्त होने के बाद पहली बार चुनाव कराने के प्रयास किये गये थे। चुनावी क्षेत्रों के निर्धारण और अपात्र सदस्यों के कथित नामांकन को लेकर उपजे विवाद के कारण यह मामला सहकारी अधिकारियों और उच्च न्यायालय के बीच कई दौर की कानूनी कार्यवाही में उलझा रहा।
इससे पहले वर्ष 2018 में उच्च न्यायालय ने रजिस्ट्रार को कानून के अनुसार क्षेत्रों का फिर से निर्धारण करने का निर्देश दिया था। रजिस्ट्रार ने हालांकि सदस्यता रजिस्टर में क्रम संख्या के आधार पर सदस्यों को क्षेत्रों में विभाजित करके इसका पालन किया, लेकिन इसमें स्पष्टता की कमी के कारण नये विवाद पैदा हो गये। दर्जनों सदस्यों के नामांकन में नियमों के उल्लंघन के आरोपों के कारण चुनाव नहीं हो सके थे। अदालत ने अनियमित नामांकन की ओर इशारा करने वाली एक जांच रिपोर्ट और 10 साल से अधिक समय से चुनाव न होने का संज्ञान लेते हुए इस मुद्दे को व्यापक रूप से हल करने का निर्णय लिया है।
सहायक रजिस्ट्रार को अब दस्तावेजों के साथ सभी सदस्यताओं का सत्यापन करने, वैध सदस्यों की सूची प्रकाशित करने और अपात्र पाये गये लोगों की आपत्तियां सुनने का निर्देश दिया गया है। यह भी कहा गया है कि सत्यापन की यह प्रक्रिया 15 मार्च 2026 तक पूरी होनी चाहिए और चुनाव 30 जून 2026 तक संपन्न कराये जाने चाहिए ताकि सहकारी समिति में लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल हो सके।
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