शिमला , जनवरी 06 -- हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने ऊना जिले से संचालित एक बड़े मादक पदार्थ तस्करी गिरोह से जुड़े मामले में आरोपी गौरव शर्मा की जमानत याचिका खारिज कर दी है।

न्यायमूर्ति वीरेंद्र सिंह ने एनडीपीएस अधिनियम के कड़े प्रावधानों का हवाला देते हुए 27 लाख रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेन-देन और व्यावसायिक मात्रा में पोस्त भूसा बरामद होने को अहम आधार माना।

यह मामला 14 जुलाई 2024 का है, जब ऊना पुलिस ने खुफिया सूचना के आधार पर माजरा के पास एक ट्रक (एचपी72सी-4761) को रोका था। तलाशी के दौरान ट्रक से 146.89 किलोग्राम पोस्त भूसा बरामद किया गया, जो एनडीपीएस एक्ट के तहत वाणिज्यिक मात्रा में आता है। मौके पर ट्रक चालक राहुलशर्मा को गिरफ्तार किया गया।

जांच के दौरान शर्मा ने कथित तौर पर खुलासा किया कि उसने 60 किलोग्राम भूसा अपने लिए और 90 किलोग्राम गौरव शर्मा के लिए खरीदा था। उसने यह भी बताया कि गौरव शर्मा ने कथित सप्लायर राजस्थान के विष्णु वैष्णव को यूपीआई और बैंक ट्रांसफर के माध्यम से दो लाख रुपये का भुगतान किया था।मामले ने तब गंभीर मोड़ लिया जब पुलिस ने गौरव शर्मा के बैंक खातों की जांच की। रिकॉर्ड के अनुसार, महज नौ महीनों में शर्मा ने यूपीआई के जरिए विष्णु वैष्णव को कुल 27 लाख रुपये ट्रांसफर किये। पूछताछ में वह इन लेनदेन के संबंध में संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सका, जिससे अभियोजन पक्ष का मामला और मजबूत हुआ।

जमानत याचिका में आरोपी के वकील ने दलील दी कि उसके पास से कोई नशीला पदार्थ बरामद नहीं हुआ है और मामला सह-आरोपी राहुल शर्मा के कथित इकबालिया बयान पर आधारित है, जिसे उच्चतम न्यायालय के तूफान सिंह फैसले के अनुसार साक्ष्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वाणिज्यिक राशि से जुड़े मामलों में एनडीपीएस अधिनियम की धारा 37 के तहत जमानत के लिए दो कड़ी शर्तें लागू होती हैं। अदालत को यह संतुष्ट होना चाहिए कि आरोपी प्रथम दृष्टया दोषी नहीं है और जमानत पर रिहा होने पर कोई अपराध नहीं करेगा।

न्यायमूर्ति सिंह ने कहा कि भले ही इस स्तर पर इकबालिया बयान की स्वीकार्यता पर प्रश्न हो, लेकिन 27 लाख रुपये का वित्तीय लेनदेन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) से सह-आरोपी और कथित आपूर्तिकर्ता के बीच लगातार संपर्क सामने आया है। यह आरोपी की संलिप्तता को लेकर 'गंभीर संदेह' पैदा करते हैं।

अदालत ने अपने आदेश में कहा, " उपरोक्त लेन-देन को देखते हुए इस स्तर पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि आरोपी इस अपराध में दोषी नहीं है।" गौरव शर्मा की यह चौथी जमानत अर्जी थी, जिसे खारिज किया गया है। इससे पहले विशेष न्यायाधीश, ऊना और उच्च न्यायालय से भी उसकी जमानत याचिकाएं नामंजूर की जा चुकी हैं।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जमानत पर की गयी टिप्पणियां केवल इसी आवेदन तक सीमित हैं और इनका प्रभाव जांच पर नहीं पड़ेगा। अब मामले में जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, जहां डिजिटल साक्ष्य, बैंक रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों की विधिवत जांच की जाएगी।

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