दरभंगा , जनवरी 10 -- िहार में ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी ने शनिवार को कहा है कि हिन्दी देश के विभिन्न राज्यों को सरल संवाद से आपस में जोड़ने वाली भाषा है और इससे देश के कोने कोने में रहने वाले लोगों के अंदर राष्ट्रभक्ति की भावना का संचार होता है।

श्री चौधरी ने स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग में आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी के प्रथम दिन 'हिन्दी का वर्तमान भारतीय सन्दर्भ और वैश्विक परिप्रेक्ष्य' विषय पर कहा कि विगत चौंतीस वर्षों के बाद लागू हुई नई शिक्षा नीति के जरिए अब शिक्षा को भारतीय ज्ञान परम्परा की समृद्ध परंपरा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, जिसमें हिन्दी की भूमिका निर्विवाद है। उन्होंने कहा कि "हमारा राष्ट्र हिन्दी के माध्यम से ही अपनी सर्वश्रेष्ठ स्थिति को प्राप्त कर विश्व गुरु के पथ की ओर अग्रसर हो सकता है।"पूर्व मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो. चंद्रभानु सिंह ने कहा कि भारत में अंग्रेजी और हिन्दी का जो भाषिक द्वैत है, वह हमारे समाज के वर्गीय चरित्र को दर्शाता है। भले ही कामकाज और अन्य क्षेत्रों में हिन्दी को और आगे बढ़ना है, लेकिन रचनात्मकता के स्तर पर हिन्दी का सम्यक एवं द्रुत विकास हुआ है।

प्रो.सिंह ने कहा कि हिन्दी सेवा में प्रवासी एवं विदेशी मूल के लेखकों का अहम योगदान रहा है। विदेशी मूल के लेखकों, कैरेबियन मूल के लेखकों आदि पर गंभीरतापूर्वक विचार करना चाहिए, उन्हें हिन्दी की मुख्यधारा में लाना अपेक्षित है। हिन्दी के वैश्विक परिप्रेक्ष्य पर चिंतन और मनन का यह एक अनिवार्य पक्ष है।

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