रायपुर , फरवरी 06 -- छत्तीसगढ शासन की नक्सल पुनर्वास नीति के तहत जिला प्रशासन द्वारा आत्मसमर्पित माओवादियों को कौशल विकास एवं आजीविका मूलक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है।

पुनर्वास कैंप के नोडल अधिकारी विनोद अहिरवार ने शुक्रवार को बताया कि कलेक्टर उत्तर बस्तर कांकेर के निर्देशानुसार सभी आत्मसमर्पित माओवादियों को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आगामी दिनों में मशरूम उत्पादन, बागवानी एवं अन्य स्वरोजगार मूलक पाठ्यक्रम भी प्रारंभ किए जाएंगे।

उत्तर बस्तर कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम चौगेल (मुल्ला) स्थित बीएसएफ कैंप परिसर अब 'कौशलगढ़' के रूप में पहचान बना रहा है। यहां मुख्यधारा में लौटे 40 आत्मसमर्पित माओवादियों को विभिन्न ट्रेड में चरणबद्ध प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे सम्मानपूर्वक जीवन यापन कर सकें। यदि मन में बदलाव और आगे बढ़ने का संकल्प हो, तो जीवन की दिशा बदली जा सकती है, इस बात को आत्मसमर्पित माओवादियों ने सच कर दिखाया है। जिन हाथों में कभी हथियार थे, वही हाथ आज हुनर सीखकर आत्मनिर्भर बनने की राह पर हैं।

राज्य में पुनर्वास नीति-2025 के अंतर्गत आत्मसमर्पित युवक-युवतियों को ड्राइविंग, सिलाई, काष्ठशिल्प कला, सहायक इलेक्ट्रिशियन जैसे रोजगारमूलक पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही निरक्षर एवं अल्पशिक्षित प्रतिभागियों के लिए कक्षा पहली से आठवीं तक की बुनियादी शिक्षा की भी व्यवस्था की गई है। 20-20 के बैच में प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।

वर्षों तक नक्सल हिंसा से प्रभावित बस्तर अंचल अब विकास और पुनर्वास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य एवं केंद्र सरकार के संयुक्त प्रयासों से हथियार छोड़ने वालों को भविष्य गढ़ने का अवसर दिया जा रहा है। चौगेल कैंप में प्रशिक्षण के साथ-साथ स्वास्थ्य परीक्षण, दवाइयों की सुविधा एवं मनोरंजनात्मक गतिविधियों जैसे खेल, कैरम, वाद्य यंत्र आदि की भी व्यवस्था की गई है।

चारपहिया वाहन चालन का प्रशिक्षण ले रहे मनहेर तारम ने बताया कि ड्राइविंग सीखने की उनकी पुरानी इच्छा अब पूरी हो रही है। प्रशिक्षकों द्वारा वाहन संचालन की बारीकियां सिखाई जा रही हैं।

वहीं नरसिंह नेताम ने कहा कि यहां मिल रहा प्रशिक्षण उनके भविष्य को सुरक्षित बनाने में सहायक होगा।

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