विशाखापट्टनम , फरवरी 20 -- नौसेना प्रमुख दिनेश कुमार त्रिपाठी ने शुक्रवार को जोर देकर कहा कि हिंद महासागर 'केवल एक भौगोलिक रणनीतिक क्षेत्र नहीं है, बल्कि एक साझा रणनीतिक क्षेत्र है', जिसकी स्थिरता वैश्विक विकास और सामूहिक कल्याण की नींव हैभारत ने 16 वर्षों के बाद हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी (आईओएनएस) की अध्यक्षता संभाली है। नौसेना प्रमुख ने 'आईओएनएस कॉन्क्लेव ऑफ चीफ्स' के नौवें आयोजन में रॉयल थाई नेवी के कमांडर-इन-चीफ पायरोट फुएंगचन से यह जिम्मेदारी ग्रहण की।

नौसेना प्रमुख ने कार्यभार संभालने के बाद सभा को संबोधित करते हुए कहा कि 21वीं सदी को व्यापक रूप से 'समुद्री सदी' और 'हिंद महासागर की सदी' के रूप में माना जा रहा है।

एडमिरल त्रिपाठी ने समुद्री सुरक्षा चुनौतियों के बदलते स्वरूप पर जोर देते हुए कहा कि दुनिया 'न केवल बहुत सारे खतरों का सामना कर रही है, बल्कि विभिन्न तरीकों में भी मेल हो रहा' है।

नौसेना प्रमुख ने उल्लेख किया कि 'उन्नत तकनीकों की बढ़ती उपलब्धता और पहुंच के साथ-साथ सरकारी और गैर-सरकारी गतिविधियों के बीच सीमा धुंधली होती जा रही है, समुद्री खतरे अब पहले से अधिक चुनिंदा, परिष्कृत और वैश्विक व्यापार के लिए अधिक विनाशकारी हो रहे हैं।'एडमिरल त्रिपाठी ने रुझानों का जिक्र करते हुए कहा, "हमारी हालिया वार्षिक रिपोर्ट ने इस महत्वपूर्ण बदलाव को उजागर किया है। भले ही घटनाओं की संख्या कम हुई हो, लेकिन व्यक्तिगत घटनाओं की गंभीरता और परिणाम बढ़ गए हैं। दूसरे शब्दों में, आज समुद्री क्षेत्र के जोखिमों और चुनौतियों को उनकी संख्या से कम और उनके प्रभाव के दायरे से अधिक पहचाना जाता है।" उन्होंने समुद्री रास्तों और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की रक्षा के लिए अधिक सतर्कता और समन्वित वैश्विक प्रतिक्रिया की आवश्यकता पर बल दिया।

नौसेना प्रमुख ने आईओएनएस की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके निरंतर मार्गदर्शन ने सदस्य देशों को क्षेत्रीय वास्तविकताओं को बेहतर ढंग से समझने, अपनी ताकत के अनुसार योगदान देने और साझा उद्देश्यों के लिए प्रयासों में तालमेल बिठाने में सक्षम बनाया है।

एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि अगले दो वर्षों में हमारा प्रयास इन 'कोर' सिद्धांतों को सुदृढ़ और गहरा करने का होगा। उन्होंने कहा, " 'सी' का अर्थ सहयोग (कोऑपरेशन) है, जो विश्वास और आपसी सम्मान पर बना है। 'ओ' का अर्थ साझा समझ और सूचनाओं के आदान-प्रदान के माध्यम से परिचालन जागरूकता ( ऑपरेशनल अवेयरनेस) है। 'आर' का अर्थ सुरक्षा चुनौतियों, प्राकृतिक आपदाओं और हाइब्रिड खतरों के सामने लचीलापन (रेज़िलिएंस) है। 'ई' का अर्थ निरंतर जुड़ाव (एंगेज़मेंट) है, ताकि सामान्य चुनौतियों के साझा समाधान खोजने के लिए सार्थक बातचीत और संवाद किया जा सके।"नौसेना प्रमुख ने कहा कि इस दृष्टिकोण को लागू करने के लिए, अध्यक्षता के दौरान मुख्य रूप से कार्यकारी समूहों को मजबूत करने, युद्धाभ्यास बढ़ाने, सूचना साझा करने और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में पेशेवर आदान-प्रदान पर जोर दिया जाएगा। इसके साथ ही, उन्होंने कहा, "हम रणनीतिक बातचीत को आगे बढ़ाने, महत्वपूर्ण दस्तावेजों को अंतिम रूप देने, ट्रेनिंग के विस्तार और नागरिकों के बीच संपर्क सुधारने की योजना बना रहे हैं।"साझा जिम्मेदारी पर जोर देते हुए एडमिरल त्रिपाठी ने कहा, "जो महासागर हम साझा करते हैं, वे हमारी नियति को जोड़ते हैं। इस समुद्री क्षेत्र के सामूहिक संरक्षक के रूप में, यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम हिंद महासागर को सुरक्षित, खुला और शांतिपूर्ण रखें।" उन्होंने दोहराया कि 'भारतीय नौसेना सुरक्षा में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है' और क्षेत्र में सुरक्षा मजबूत करने के लिए अपने सहयोगियों के साथ मिलकर हर संभव प्रयास करेगी।

नौसेना के उप-प्रमुख वाइस एडमिरल तरुण सोबती ने हिंद महासागर के रणनीतिक और आर्थिक केंद्रीयता पर जोर देते हुए कहा, "यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा प्रवाह के लिए केंद्रीय है तथा यह विभिन्न तटवर्ती देशों, अर्थव्यवस्थाओं और समाजों को जोड़ता है।"वाइस एडमिरल सोबती ने उल्लेख किया कि हिंद महासागर क्षेत्र वर्तमान में 'बदलते व्यापार पैटर्न, तकनीकी प्रगति, पर्यावरणीय दबाव और भारी समुद्री यातायात के कारण निरंतर परिवर्तन के दौर' से गुजर रहा है।

समुद्र में बढ़ती जटिलताओं की चेतावनी देते हुए, नौसेना उप-प्रमुख ने कहा कि 'ये बदलाव पहले से ही भीड़भाड़ वाले और प्रतिस्पर्धी समुद्री क्षेत्र को और जटिल बना देते हैं'। इसके साथ ही उन्होंने 'समुद्र में स्थिरता और आपसी भरोसे को बनाए रखने के महत्व' पर जोर दिया।

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